प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे
खोज, बचाव, उपचार, राहत, संचार और सड़क बहाली अभियान की विस्तृत जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राहत, खोज एवं बचाव अभियान से जुड़े आंकड़ों और सरकार की तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की है।
काठमांडू : नेपाल में भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार तेज किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने सोशल मीडिया पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रभावित नागरिकों की जान बचाना
सरकार की पहली प्राथमिकता है। प्रतिकूल मौसम और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद
अब तक 7,514 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे 279 लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
नेपाली सेना बाकी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही है।
भारत और चीन के विशेषज्ञ भी नेपाली सेना के साथ समन्वय कर बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
🚁 16 हेलीकॉप्टरों ने भरी 236 उड़ानें
प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए नेपाली सेना और निजी क्षेत्र के
16 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। अब तक इन हेलीकॉप्टरों ने
236 उड़ानें भरी हैं।
नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल समेत
18,708 सुरक्षाकर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
सरकार के अनुसार खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान में चुनौतियां बनी हुई हैं।
675 शव बरामद, पहचान की प्रक्रिया जारी
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि
रासुवा, धादिंग, नुवाकोट, चितवन, तनहुं, गोरखा, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम
समेत विभिन्न क्षेत्रों से अब तक 675 शव बरामद किए जा चुके हैं।
सरकार ने कहा है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उन्हें सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है।
पहचान के लिए डीएनए और अन्य जरूरी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
जिन शवों की पहचान परिवार के स्तर पर हो चुकी है, उन्हें परिजनों को सौंपने का काम जारी है।
🏥 घायलों का इलाज, मानसिक परामर्श की भी व्यवस्था
गंभीर रूप से घायल लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है।
धुन्चे में मोबाइल अस्पताल के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम इलाज कर रही है।
सफ्रुबेसी, रासुवा अस्पताल और अन्य प्रभावित इलाकों में भी चिकित्सकीय टीमें काम कर रही हैं।
घायलों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए मानसिक परामर्श की व्यवस्था भी की गई है।
15 राहत शिविर, 3,500 विस्थापितों के लिए अस्थायी ठिकाना
रासुवा और नुवाकोट में प्रभावित नागरिकों के लिए 15 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
बाढ़ के कारण विस्थापित करीब 3,500 लोगों को स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में अस्थायी आवास उपलब्ध कराया गया है।
नेपाल रेडक्रॉस, नेपाल स्काउट, लायंस क्लब और अन्य स्वयंसेवी संगठन भी राहत कार्य में जुटे हैं।
पांच जिलों के 15 स्थानीय निकायों में आवश्यक सेवाओं के संचालन के लिए
6 करोड़ 75 लाख नेपाली रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
🌏 भारत समेत कई देशों से मदद
नेपाल को इस भीषण आपदा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता भी मिल रही है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत ने तीन चरणों में कुल 57.5 टन मानवीय राहत सामग्री और जरूरी दवाएं भेजी हैं।
चीन और अमेरिका की ओर से भी सहायता मिल रही है। चीन से
30 बेलिब्रिज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
भारत और चीन से शवों के सुरक्षित प्रबंधन के लिए एयरटाइट बैग भी उपलब्ध कराए गए हैं।
📡 संचार और सड़क व्यवस्था बहाल
बाढ़ से नेपाल टेलीकॉम और एनसेल के कई मोबाइल टावर प्रभावित हुए थे।
सरकार ने ईंधन, सोलर पैनल और जनरेटर पहुंचाकर संचार व्यवस्था को फिर से बहाल करने का अभियान चलाया है।
वहीं मुख्य सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्गों को खोलकर प्रभावित इलाकों तक पहुंच बहाल की जा रही है।
पृथ्वी राजमार्ग के गल्छी-मालखु खंड में करीब 13 किलोमीटर क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त कर यातायात बहाल किया गया है।
💰 राहत कोष में आर्थिक मदद, सरकार ने जारी की अपील
नेपाल सरकार ने आपदा प्रभावितों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा कोष और प्रधानमंत्री कोष के माध्यम से
आर्थिक सहयोग जुटाने की व्यवस्था की है। सरकार ने लोगों से केवल आधिकारिक क्यूआर कोड और आधिकारिक बैंक खातों के माध्यम से ही सहयोग करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा है कि प्रभावित नागरिकों की जान बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
राहत, खोज और पुनर्बहाली का अभियान लगातार जारी रहेगा।
सरकार ने नागरिकों और मीडिया से संकट की घड़ी में अफवाहों से बचने तथा सही और तथ्यात्मक जानकारी साझा करने की अपील की है।
