मोतिहारी/पताही: पूर्वी चंपारण के बहुचर्चित मधुबन ऑपरेशन धमाका कांड में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। डीएसपी कुमार चंदन के निर्देश पर पताही थानाध्यक्ष बबन कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पताही थाना क्षेत्र के नोनफरवा गांव निवासी कुख्यात नक्सली सुरेश बैठा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ मधुबन धमाका कांड समेत आधा दर्जन से अधिक नक्सली मामले दर्ज हैं। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
थानाध्यक्ष बबन कुमार ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उससे पूछताछ में पुराने नक्सली नेटवर्क, फरार आरोपितों और संगठन की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
23 जून 2005… जब मधुबन पर टूटा था नक्सलियों का कहर
पूर्वी चंपारण के इतिहास में 23 जून 2005 का दिन आज भी खौफनाक यादों के साथ दर्ज है। दोपहर करीब एक बजे करीब 1000 से अधिक सशस्त्र माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से मधुबन पर धावा बोल दिया था। इस हमले को नक्सलियों ने ‘ऑपरेशन धमाका’ नाम दिया था।
माओवादियों ने एक साथ मधुबन थाना, भारतीय स्टेट बैंक की शाखा, प्रखंड सह अंचल कार्यालय, तत्कालीन सांसद सीताराम सिंह के आवास और एक पेट्रोल पंप पर हमला किया। अत्याधुनिक हथियारों और विस्फोटकों से लैस नक्सलियों ने कई घंटों तक पूरे इलाके में तांडव मचाया। थाने पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, सरकारी हथियार लूट लिए गए और बैंक से लाखों रुपये लेकर नक्सली फरार हो गए।
20 लोगों की मौत, कई परिवारों की उजड़ गई दुनिया
हमले के बाद लौट रहे नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस पूरे घटनाक्रम में 20 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 16 माओवादी, दो पुलिसकर्मी तथा बैंक गार्ड रूप नारायण सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे। ड्यूटी पर तैनात सिपाही नासिर हुसैन और बैंक गार्ड रूप नारायण सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नक्सलियों का मुकाबला किया और शहीद हो गए।
हमले में सरकारी कार्यालयों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। कई वाहनों में आग लगा दी गई और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। इस घटना ने पूरे बिहार ही नहीं, देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
नेपाल से भी आए थे माओवादी, ये थे मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया था कि इस हमले का नेतृत्व हार्डकोर नक्सली कमांडर रामप्रवेश बैठा और रामबाबू राम कर रहे थे। इस ऑपरेशन में बिहार के अलावा नेपाल और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में माओवादी शामिल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की थी।
सीआरपीएफ की तैनाती के बाद बदले हालात
ऑपरेशन धमाका के बाद मधुबन और आसपास के इलाकों में सीआरपीएफ तथा बिहार पुलिस की लगातार कार्रवाई से नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगाया गया। एक समय नक्सलियों के गढ़ के रूप में पहचान रखने वाला यह इलाका अब काफी हद तक सामान्य हो चुका है। हालांकि पुलिस आज भी इस कांड से जुड़े फरार आरोपितों की तलाश में लगातार अभियान चला रही है।
21 साल बाद भी जारी है न्याय की लड़ाई
सुरेश बैठा की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस मधुबन ऑपरेशन धमाका कांड के आरोपितों को कानून के कटघरे तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से कई पुराने राज खुल सकते हैं और फरार नक्सलियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
SHO बबन कुमार ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक नक्सली मामले दर्ज हैं। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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