मोतिहारी: पूर्वी चंपारण पुलिस ने अपने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए साप्ताहिक मेस मेन्यू जारी किया है। इस नए मेन्यू में जवानों को पौष्टिक, संतुलित एवं प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट रहकर बेहतर पुलिसिंग कर सकें।
जारी मेन्यू के अनुसार सप्ताह के सातों दिन नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि भोजन अलग-अलग निर्धारित किया गया है। नाश्ते में प्रतिदिन अंकुरित चना-मूंग, केला तथा अंडा या छेना शामिल किया गया है, जिससे जवानों को पर्याप्त प्रोटीन और ऊर्जा मिल सके।
दोपहर के भोजन में संतुलित आहार
सुबह 10 बजे परोसे जाने वाले भोजन में अधिकांश दिनों में चावल या रोटी, दाल, मौसमी सब्जी, सलाद, पापड़, अचार और चटनी शामिल रहेगी। सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अंडा करी, कढ़ी और चिकन जैसी विशेष डिश भी मेन्यू में रखी गई हैं।
रात्रि भोजन में भी विविधता
रात 8:30 बजे दिए जाने वाले भोजन में सोयाबीन की सब्जी, राजमा, पनीर, हरी सब्जी, बेसन की सब्जी, छोला, लिट्टी-चोखा, मटन तथा अन्य पौष्टिक व्यंजन शामिल किए गए हैं। इसके साथ रोटी, सलाद और अचार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वस्थ पुलिस बल पर जोर
मेस मेन्यू के नीचे दिए गए संदेश “स्वस्थ भोजन, स्वस्थ जीवन – सेवा के लिए सशक्त शरीर” के माध्यम से पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वस्थ पुलिसकर्मी ही बेहतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस विभाग का मानना है कि संतुलित भोजन से जवानों की कार्यक्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक एकाग्रता बढ़ेगी। लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए यह पहल काफी लाभदायक मानी जा रही है।
सप्ताहभर के मेन्यू की प्रमुख बातें
- प्रतिदिन नाश्ते में अंकुरित चना-मूंग, केला तथा अंडा/छेना।
- दोपहर में दाल, चावल या रोटी, मौसमी सब्जी, सलाद, पापड़, अचार और चटनी।
- सप्ताह में एक दिन चिकन, एक दिन मटन और एक दिन अंडा करी।
- रात्रि भोजन में पनीर, राजमा, सोयाबीन, हरी सब्जियां, छोला और लिट्टी-चोखा जैसी पौष्टिक डिश।
- संतुलित एवं प्रोटीन युक्त भोजन के माध्यम से जवानों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की पहल।
डीबी ब्रेकिंग की नजर: अक्सर पुलिसकर्मियों की लंबी ड्यूटी और अनियमित दिनचर्या उनके स्वास्थ्य पर असर डालती है। ऐसे में मोतिहारी पुलिस द्वारा वैज्ञानिक और संतुलित मेस मेन्यू लागू करना एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। यदि इसका प्रभावी पालन हुआ तो यह जवानों की फिटनेस और कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
