2023 के निर्देश का अब तक अनुपालन नहीं, पटना हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से चार सप्ताह में मांगा शपथपूर्वक जवाब
मोतिहारी। मोतिहारी के पुनर्जीवन कार्य को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि पांच मई 2023 को दिए गए उसके निर्देश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को चार सप्ताह के भीतर शपथपूर्वक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह और न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडेय की खंडपीठ ने 21 अगस्त 2026 को की। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पांच मई 2023 को पारित फैसले की प्रति बिहार के मुख्य सचिव और पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को भेजी गई थी। उन्हें संबंधित पुनर्जीवन कार्य की व्यक्तिगत स्तर पर निगरानी करनी थी। इसके बावजूद कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।
चार सप्ताह में देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर शपथपूर्वक कारण बताएं कि पांच मई 2023 के फैसले में दिए गए निर्देशों का अनुपालन क्यों नहीं हुआ। इसके बाद मामले को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
कई बड़े अधिकारी मामले में पक्षकार
मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव के अलावा सड़क निर्माण, जल संसाधन, नगर विकास एवं आवास, वन और पर्यटन विभाग के अधिकारी पक्षकार हैं। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मोतिहारी नगर निगम के नगर आयुक्त और मोतिहारी सदर के अनुमंडल पदाधिकारी भी मामले में पक्षकार बनाए गए हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मुख्य सचिव की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब पर नजर है। कोर्ट ने साफ तौर पर अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
कोर्ट का आदेश: हाईकोर्ट ने कहा है कि वर्ष 2023 में जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं हुआ है और इसी आधार पर मुख्य सचिव से चार सप्ताह में शपथपूर्वक जवाब मांगा गया है।
