मोतिहारी: हरसिद्धि में आइसक्रीम खाने के बाद बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने जिले में बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में कोटवा थाना क्षेत्र के कररिया स्थित मेसर्स बेस्ट चॉइस आइसक्रीम प्रतिष्ठान बिना आवश्यक खाद्य लाइसेंस के संचालित पाया गया। शनिवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पुलिस के सहयोग से प्रतिष्ठान में छापेमारी की। इस दौरान लीची कैंडी के 70 पीस और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की 296 आइस कैंडी नष्ट कराई गईं। अलग-अलग उत्पादों के नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई हरसिद्धि थाना क्षेत्र के गायघाट हाईस्कूल के गेट के पास आइसक्रीम खाने के बाद करीब आधा दर्जन बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के बाद हुई है। बच्चों ने मुंह में जलन और होंठ आपस में चिपकने की शिकायत की थी। एक बच्चे के होंठ से खून निकलने की बात भी सामने आई थी। घटना के बाद पुलिस ने आइसक्रीम बेचने वाले व्यक्ति को पूछताछ के लिए थाने ले जाकर मामले की जांच शुरू की थी।
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बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में जांच का दायरा अब आइसक्रीम बेचने वाले व्यक्ति से आगे बढ़कर उसे तैयार करने वाली इकाई तक पहुंच गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के फूड इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार ने कोटवा और हरसिद्धि थाना पुलिस के सहयोग से कररिया स्थित प्रतिष्ठान की जांच की। विभाग के अनुसार, जांच के दौरान खाद्य कारोबार के लिए आवश्यक लाइसेंस नहीं मिला। प्रतिष्ठान का संचालन मासूम नामक व्यक्ति द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। उसके पिता का नाम रणजीत प्रसाद गुप्ता बताया गया है।
कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लीची कैंडी के 70 पीस और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की 296 आइस कैंडी नष्ट कराई गईं। प्रतिष्ठान में तैयार किए जा रहे अलग-अलग उत्पादों के नमूने भी लिए गए हैं। इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही उत्पादों की गुणवत्ता और बच्चों के बीमार पड़ने की घटना से उनके संभावित संबंध के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल किसी हानिकारक पदार्थ या मिलावट की पुष्टि नहीं हुई है।
रात में ही लगवा दिया गया था ताला
जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग के निर्देश पर कोटवा थाना पुलिस ने शुक्रवार रात ही प्रतिष्ठान में ताला लगवा दिया था। इसके बाद शनिवार को विभाग की टीम ने पुलिस के सहयोग से वहां पहुंचकर जांच और कार्रवाई की। बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के बाद संबंधित प्रतिष्ठान की जांच में लाइसेंस नहीं मिलने से खाद्य कारोबार के नियमन और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
जिले में 100 से अधिक इकाइयों के संचालन की चर्चा
जिले में आइसक्रीम, चॉकलेट और बच्चों के लिए दूसरे खाद्य उत्पाद बनाने वाली छोटी इकाइयों की निगरानी भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में इस तरह की 100 से अधिक इकाइयों के बिना आवश्यक लाइसेंस संचालित होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन इकाइयों की संख्या और लाइसेंस की स्थिति का आधिकारिक सर्वेक्षण सामने आना बाकी है।
ग्रामीण इलाकों में कम कीमत वाली आइसक्रीम और अन्य रंगीन खाद्य उत्पाद बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। स्कूलों के आसपास, गांवों के चौक-चौराहों और हाट-बाजारों में ठेले के जरिए इनकी बिक्री होती है। ऐसे में किसी उत्पाद की गुणवत्ता या उसके निर्माता की पहचान को लेकर सवाल उठने पर बच्चों की सुरक्षा सीधे प्रभावित हो सकती है। बेस्ट चॉइस प्रतिष्ठान की जांच के बाद यह देखना जरूरी होगा कि जिले में ऐसी दूसरी इकाइयां खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
खाद्य कारोबार की अलग-अलग श्रेणियों के लिए लागू नियमों के अनुसार पंजीकरण या लाइसेंस आवश्यक होता है। आइसक्रीम बनाने वाली इकाई और तैयार उत्पाद बेचने वाले छोटे विक्रेता की कारोबारी श्रेणी अलग हो सकती है, लेकिन दोनों को अपने कारोबार पर लागू खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है। ऐसे में निर्माण इकाइयों के दस्तावेज, उत्पादों की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण है।
ठेले से फैक्ट्री तक जांच जरूरी
हरसिद्धि की घटना में बच्चों के बीमार पड़ने का वास्तविक कारण प्रयोगशाला जांच और चिकित्सकीय आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसके साथ ही संबंधित आइसक्रीम का स्रोत, निर्माण स्थल और वितरण व्यवस्था भी जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फूड इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि ऐसे गैर लाइसेंसी प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जाएगी। कमियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग की कार्रवाई बेस्ट चॉइस प्रतिष्ठान तक सीमित रहेगी या जिले में बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद बनाने वाली दूसरी इकाइयों की भी जांच होगी। ग्रामीण बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित निगरानी, संदिग्ध उत्पादों के नमूने की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि बच्चों की सेहत से जुड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई हो सके।
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