मोतिहारी। देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी एवं पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के ड्रग माफिया के खिलाफ चलाए गए दो साल के अभियान की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्वर्ण प्रभात और उनकी टीम को बधाई देते हुए इसे शानदार उपलब्धि बताया। किरण बेदी ने लिखा, “Fantastic and National Gratitude. May you continue to succeed. Key is integrity of purpose with determination.” यानी शानदार उपलब्धि और राष्ट्रीय स्तर पर आभार। आप लगातार सफल होते रहें। उद्देश्य के प्रति ईमानदारी और दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी है।
किरण बेदी की मूल एक्स पोस्ट यहां देखें।
किरण बेदी की यह टिप्पणी पूर्वी चंपारण में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए गए अभियान के आंकड़ों के संदर्भ में आई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16 सितंबर 2024 से 10 सितंबर 2026 तक की अवधि में जिले में करीब 52.66 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। इस दौरान 531 मामले दर्ज हुए और 669 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 100 आरोपितों को न्यायालय से सजा दिलाई गई। पुलिस की कार्रवाई का उल्लेखनीय पहलू यह है कि गिरफ्तारियों के साथ मामलों को न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
बरामदगी से लेकर सजा तक
नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई में केवल मादक पदार्थों की बरामदगी ही नहीं, बल्कि आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य जुटाना, जांच पूरी करना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी करना भी अहम है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस अवधि में सजा पाने वाले 100 दोषियों में 64 को सात साल या उससे अधिक के कारावास की सजा मिली। करीब 500 अन्य आरोपितों के मामले न्यायालय में विचाराधीन बताए गए हैं। इन मामलों में अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।
दो वर्षों के अभियान के आंकड़े बताते हैं कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने लगातार कार्रवाई की है। हालांकि, इस अभियान के वास्तविक प्रभाव का आकलन तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई, मामलों के निस्तारण और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर लगने वाली रोक के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
गांजा, चरस, अफीम और स्मैक की बरामदगी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान गांजा की सबसे बड़ी मात्रा जब्त की गई। करीब 8,967 किलोग्राम गांजा बरामद होने का उल्लेख है, जिसकी अनुमानित कीमत 44.84 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा चरस, अफीम, स्मैक और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की बरामदगी भी दर्ज की गई।
पूर्वी चंपारण की भौगोलिक स्थिति भी इस अभियान को महत्वपूर्ण बनाती है। जिले की सीमा नेपाल से लगती है। ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, संदिग्ध खेपों की जांच और तस्करी से जुड़े लोगों के नेटवर्क का पता लगाना पुलिस के लिए अहम चुनौती है।
हाल की कार्रवाइयों में भी दिखी सख्ती
पूर्वी चंपारण में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ हाल के दिनों में भी पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। 28 सितंबर 2026 को झरोखर थाना पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने कबैया गांव में छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपितों के बैग से 61.890 किलोग्राम गांजा जैसा संदिग्ध पदार्थ बरामद हुआ था। मामले में कानूनी कार्रवाई की गई।
इससे पहले 25 सितंबर को मोतिहारी के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के रुलही गांव में पुलिस ने एक पान गुमटी पर छापेमारी कर गांजा और अन्य नशीले सामान की बरामदगी की जानकारी दी थी। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना, चुनौती अब भी बरकरार
किरण बेदी की सार्वजनिक प्रशंसा से पूर्वी चंपारण में चलाए गए अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। हालांकि, नशे के अवैध कारोबार पर स्थायी अंकुश लगाने के लिए लगातार निगरानी, तस्करी के स्रोतों तक पहुंचना और न्यायालय में मामलों को तार्किक परिणति तक लगातार पहुंचाना जरूरी है।
करीब 52.66 करोड़ रुपये के मादक पदार्थों की जब्ती, 669 गिरफ्तारियां और 100 दोषियों को सजा अभियान के प्रमुख आंकड़े हैं। वहीं, विचाराधीन मामलों और तस्करी की आशंका वाले मार्गों पर निगरानी बनाए रखना आगे की चुनौती है। अभियान की सफलता का आकलन इन उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य में नशे की आपूर्ति और अवैध कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव से भी होगा।
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