मोतिहारी। असम में पूर्वी चंपारण के युवक अभिषेक कुमार सिंह की पाकिस्तान से जुड़े कथित जासूसी मामले में गिरफ्तारी के बीच मोतिहारी शहर में चादर बेचने वाले दो संदिग्ध युवकों को लेकर सनसनी फैल गई। रघुनाथपुर इलाके में दोनों युवक महंगी चादरें बेहद कम कीमत पर बेच रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक चादर पर ‘Made in Pakistan’ लिखा मिला, जबकि कुछ अन्य चादरों पर लिखे इस विवरण को मिटाने के निशान दिखे। लोगों को संदेह हुआ तो पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले दोनों युवक मौके से निकल गए।

बताया गया कि दोनों युवक चादरों की कीमत करीब एक-दो सौ रुपये बता रहे थे। खरीदारी के दौरान एक स्थानीय युवक को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं। चादर की जांच करने पर पाकिस्तान निर्मित होने का उल्लेख सामने आया। इसके बाद मोहल्ले में चर्चा फैल गई और पुलिस को सूचना दी गई। हालांकि, इन चादरों के वास्तविक स्रोत और दोनों युवकों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इसी बीच असम में मोतिहारी के अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। असम STF के अनुसार, पूर्वी चंपारण निवासी अभिषेक पर पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव को सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी देने का आरोप है। उसके पास से मोबाइल, सिम कार्ड और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। मामले की जांच जारी है।
नेपाल सीमा के कारण पहले भी सामने आते रहे हैं गंभीर मामले
पूर्वी चंपारण का भारत-नेपाल सीमा से सटा इलाका सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से संवेदनशील रहा है। वर्ष 2016 में झरोखर क्षेत्र से दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत चार संदिग्धों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसके बाद घोड़ासहन रेल ट्रैक पर विस्फोटक रखने की साजिश के मामले में NIA ने चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में नेपाल के संपर्क और कथित ISI लिंक की बात सामने आई थी।
हाल के वर्षों में भी जिले में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े मामले सामने आए हैं। 2025 में NIA ने मोतिहारी से कथित खालिस्तानी आतंकी कश्मीर सिंह को गिरफ्तार किया था। वहीं 2026 में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां कई कार्रवाई कर चुकी हैं।
ऐसे में रघुनाथपुर में पाकिस्तान निर्मित बताई जा रही चादरों के साथ दो संदिग्धों के अचानक गायब होने की घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चादरें वास्तव में कहां से आई थीं और उन्हें बेचने वाले दोनों युवक कौन थे। पुलिस जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
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