एसडीएम-एसडीपीओ तलाश रहे नई जगह-एसपी स्वर्ण प्रभात
मुख्य सड़क पर संचालित बस स्टैंड को हटाने की लंबे समय से उठती रही है मांग, आसपास रिहायशी मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान होने से बढ़ता है हादसों का खतरा; एसपी के बयान के बाद प्रशासन ने शुरू की वैकल्पिक जगह की तलाश
मोतिहारी: रघुनाथपुर बस स्टैंड के पास युवा किसान उमेश कुमार की सड़क हादसे में मौत के बाद अब इस इलाके की यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। रघुनाथपुर बस स्टैंड को मौजूदा जगह से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। एसपी ने स्पष्ट किया है कि शहर के अंदर बसों का परिचालन नहीं होगा। इसके लिए सदर एसडीएम और सदर एसडीपीओ को वैकल्पिक बस स्टैंड की जगह तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है।
दरअसल, रघुनाथपुर में जिस स्थान पर अभी बस स्टैंड संचालित है, वह मुख्य सड़क पर स्थित है। आसपास रिहायशी मकानों के साथ दुकानें और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं। बसों के ठहराव, यात्रियों की भीड़ और सड़क पर वाहनों की आवाजाही के कारण इस हिस्से में यातायात का दबाव बना रहता है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बस स्टैंड को इस जगह से हटाने की मांग उठती रही है। उमेश की मौत के बाद यह पुराना मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
एक हादसे ने फिर खड़ा किया बस स्टैंड की जगह पर सवाल
3 अक्टूबर को रघुनाथपुर बस स्टैंड के पास तुरकौलिया थाना क्षेत्र के माठवा गांव निवासी उमेश कुमार की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह बाइक से गोभी का बीज लाने जा रहे थे। इसी दौरान मां भवानी कंपनी की बस की चपेट में आने से उनकी जान चली गई। खेती-किसानी के साथ उमेश अपने चिकित्सक भाई के क्लीनिक पर दवा दुकान भी संभालते थे। उनकी शादी महज तीन महीने पहले हुई थी।
इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। दुर्घटना के बाद शव को अस्पताल भेजने के तरीके को लेकर भी विवाद हुआ। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एंबुलेंस की जगह ठेला गाड़ी से शव भेजा। इसके विरोध में लोगों का आक्रोश सामने आया और सड़क पर जाम की स्थिति बन गई।
इस हादसे की विस्तृत रिपोर्ट DB Breakings ने पहले प्रकाशित की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें: गोभी का बीज लाने मोतिहारी आ रहे किसान उमेश कुमार की सड़क हादसे में मौत, तीन महीने पहले हुई थी शादी।
शव को ठेले से भेजने पर पुलिसकर्मी पर हुई कार्रवाई
हादसे के बाद शव को ठेला गाड़ी से पोस्टमार्टम के लिए भेजने के मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए थे। मामले की जांच के बाद एसपी ने रघुनाथपुर थाने के गश्ती पदाधिकारी अंबिका प्रसाद यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं, थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में जांच के दौरान गश्ती पदाधिकारी और थानाध्यक्ष की कार्यशैली में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और मनमानेपन की बात सामने आने का उल्लेख किया गया था। इस कार्रवाई की पूरी खबर यहां पढ़ें: उमेश की मौत के बाद ठेले पर शव भेजने का मामला: रघुनाथपुर थाने के गश्ती पदाधिकारी निलंबित, थानाध्यक्ष से जवाब तलब।
मुख्य सड़क पर बसों का दबाव, स्थानीय लोगों की पुरानी मांग
रघुनाथपुर बस स्टैंड को हटाने की मांग केवल मौजूदा हादसे के बाद नहीं उठी है। जिस जगह बसें रुकती हैं, वहां मुख्य सड़क पर ही यात्रियों का जमावड़ा होता है। बसों के रुकने और आगे बढ़ने के दौरान दूसरे वाहनों को भी रास्ता निकालने में परेशानी होती है। आसपास घर और दुकानें होने के कारण स्थानीय लोगों की आवाजाही भी इसी सड़क से होती है।
ऐसे में बसों का ठहराव और सड़क पर बढ़ता यातायात दबाव दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ाता है। स्थानीय लोगों की मांग रही है कि बस स्टैंड को मुख्य सड़क से हटाकर किसी ऐसे स्थान पर विकसित किया जाए, जहां बसों के आने-जाने और यात्रियों के चढ़ने-उतरने की अलग व्यवस्था हो। इससे मुख्य सड़क पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
सदर एसडीएम और एसडीपीओ को मिली जिम्मेदारी
एसपी के ताजा बयान के मुताबिक, शहर के अंदर बसों का परिचालन नहीं होगा। रघुनाथपुर बस स्टैंड के लिए वैकल्पिक स्थान की तलाश सदर एसडीएम और सदर एसडीपीओ कर रहे हैं। प्रशासन के सामने ऐसी जगह चुनने की चुनौती होगी, जहां बसों के ठहराव, पार्किंग और यात्रियों की आवाजाही के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो। साथ ही वहां से शहर और आसपास के इलाकों तक यात्रियों की पहुंच भी आसान रहनी चाहिए।
हालांकि, नई जगह का चयन कब तक होगा और बस स्टैंड को मौजूदा स्थान से हटाने की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसकी समयसीमा अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर विकल्प तलाशने की बात कही गई है।
बस स्टैंड शिफ्ट हुआ तो शहर की यातायात व्यवस्था को मिल सकती है राहत
रघुनाथपुर बस स्टैंड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला जमीन पर उतरता है तो इससे मुख्य सड़क पर बसों का दबाव कम हो सकता है। लेकिन केवल बसों को दूसरी जगह भेजना पर्याप्त नहीं होगा। नए स्थान पर व्यवस्थित पार्किंग, यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, पेयजल और शहर तक आने-जाने के साधनों की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
इसके अलावा पुराने बस स्टैंड वाले स्थान पर दोबारा बसों और यात्री वाहनों का अनियंत्रित ठहराव न हो, इसके लिए भी प्रशासन को व्यवस्था करनी होगी। उमेश कुमार की मौत के बाद उठी यह पहल अब रघुनाथपुर की वर्षों पुरानी यातायात समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन नई जगह का चयन कितनी जल्दी करता है और बस स्टैंड को वास्तव में कब शिफ्ट किया जाता है।
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