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कोटवा में सुदीश राम की मौत पर बड़ा अपडेट: 5 लीटर शराब के साथ पकड़ा गया था, जेल जाने से पहले मेडिकल में ‘फिट’

मोतिहारी: कोटवा थाना क्षेत्र के बड़हरवा कला निवासी सुदीश राम की मौत के मामले में पुलिस की ओर से नया अपडेट सामने आया है। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि सुदीश राम को 5 लीटर शराब के साथ पकड़ा गया था और जेल भेजे जाने से पहले चिकित्सकीय जांच कराई गई थी। मेडिकल में चिकित्सक ने उसे मेडिकली फिट पाया था। इसके बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया।
वहीं, सुदीश की मौत को लेकर उसके परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जिम्मेदारी अब सदर एसडीपीओ-2 जितेश पाण्डेय को दी गई है। एसपी ने उन्हें पूरे मामले की जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया है।
एसपी ने बताया- 5 लीटर शराब के साथ पकड़ा गया था सुदीश
एसपी स्वर्ण प्रभात के अनुसार, सुदीश राम को 30 तारीख को 5 लीटर शराब के साथ पकड़ा गया था। एसपी ने यह भी बताया कि उसका पूर्व में भी शराब से संबंधित इतिहास रहा है। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार उसका मेडिकल कराया गया। चिकित्सक ने जांच के बाद उसे जेल जाने के लिए मेडिकल रूप से फिट पाया।
मेडिकल जांच के बाद सुदीश को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेजा गया था। पुलिस के इस बयान के बाद अब सुदीश की बाद की तबीयत बिगड़ने और सदर अस्पताल पहुंचने के बीच का घटनाक्रम जांच के केंद्र में है।
जेल जाने से पहले मेडिकल में था ‘मेडिकली फिट’
इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट अहम दस्तावेज बन गई है। पुलिस के अनुसार, चिकित्सक ने सुदीश को मेडिकल जांच के दौरान ‘फिजिकली फिट’ पाया था। यानी न्यायालय में पेश किए जाने और जेल भेजे जाने से पहले हुए चिकित्सकीय परीक्षण में उसे फिट पाया गया था।
इसके बाद उसकी तबीयत किन परिस्थितियों में बिगड़ी, वह सदर अस्पताल में कब भर्ती हुआ और आईसीयू में इलाज के दौरान उसकी मौत कैसे हुई, इन सवालों का जवाब अब जांच के दौरान सामने आना है।
परिजनों का आरोप- थाने में मारपीट हुई, मांगे गए 50 हजार रुपये
इससे पहले प्रकाशित रिपोर्ट में मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि सुदीश राम को 29 तारीख की शाम करीब चार बजे शराब पीने के आरोप में घर से पकड़कर कोटवा थाना ले जाया गया था। परिवार का दावा था कि थाने की हाजत में उसके साथ मारपीट की गई।
परिजनों के मुताबिक, 30 तारीख की सुबह वे सुदीश से मिलने थाना पहुंचे थे। इसी दौरान परिवार ने थाना प्रभारी की ओर से 50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि वे इतनी रकम देने में सक्षम नहीं थे, जिसके बाद वे थाना से वापस लौट गए।
परिवार के मुताबिक, उसी दिन रात करीब दस बजे थाना से उनके पास फोन आया कि सुदीश सदर अस्पताल में भर्ती है। इसके बाद परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां उनकी ओर से बताया गया कि सुदीश गंभीर हालत में था। परिजनों का आरोप है कि उसने थाने में मारपीट किए जाने की बात कही थी। बाद में आईसीयू में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
थानाध्यक्ष ने पहले ही आरोपों को बताया था बेबुनियाद
मामले में कोटवा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने पैसे मांगने और थाने में मारपीट किए जाने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया था। उनका कहना था कि जब युवक को थाना से मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था, तब भी उसके शरीर में हल्का कंपन था। सदर अस्पताल में मेडिकल के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया और न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। इसके बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
थानाध्यक्ष ने थाने में सुदीश के साथ मारपीट या किसी कठोर कार्रवाई से भी इनकार किया था।
24 घंटे में जांच रिपोर्ट देंगे एसडीपीओ-2 जितेश पाण्डेय
अब एसपी स्वर्ण प्रभात ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सदर एसडीपीओ-2 जितेश पाण्डेय को सौंपी है। उन्हें परिजनों की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया गया है।
जांच में सुदीश को पकड़े जाने के समय की स्थिति, बरामद शराब, मेडिकल जांच, न्यायालय में पेशी, जेल भेजे जाने और उसके बाद अस्पताल में भर्ती होने तक के पूरे घटनाक्रम को देखा जाएगा। साथ ही परिजनों की ओर से लगाए गए मारपीट और रुपये मांगने के आरोपों की भी जांच होगी।
मेडिकल में फिट से आईसीयू तक कैसे पहुंचा सुदीश? जांच में सामने आएगा सच
इस मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि जिस युवक को पुलिस के अनुसार जेल भेजे जाने से पहले मेडिकल जांच में फिट पाया गया था, उसकी तबीयत बाद में किन परिस्थितियों में बिगड़ी। सुदीश सदर अस्पताल कब और किस स्थिति में पहुंचा, उसे आईसीयू में भर्ती कराने की जरूरत क्यों पड़ी और उसकी मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था—इन तमाम पहलुओं की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
फिलहाल परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगी।
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अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
सुदीश राम की मौत के बाद उठे सवालों के बीच अब एसडीपीओ-2 जितेश पाण्डेय की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एसपी ने 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और सुदीश की तबीयत बिगड़ने से लेकर उसकी मौत तक वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ।
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