मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के कोटवा थाना क्षेत्र में शराब पीने के आरोप में पकड़े गए एक युवक की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों ने थाने की हाजत में मारपीट किए जाने और थाना प्रभारी पर 50 हजार रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि रुपये देने में असमर्थता जताकर थाने से लौटने के बाद उसी रात उन्हें फोन कर बताया गया कि सुदीश राम सदर अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल पहुंचने पर उसकी हालत गंभीर मिली। बाद में आईसीयू में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दूसरी ओर, थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने पैसे मांगने और थाने में मारपीट किए जाने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। जानकारी के अनुसार पीएसआई प्रीति कुमारी ने उसको गिरफ्तार किया था।
मृतक की पहचान कोटवा थाना क्षेत्र के बड़हरवा कला, पूर्वी वार्ड संख्या-5 निवासी सुदीश राम के रूप में हुई है। वह स्वर्गीय मिट्ठू राम का पुत्र था।
29 की शाम घर से ले गई थी पुलिस, अगले दिन पैसे मांगने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, 29 तारीख की शाम करीब चार बजे कोटवा थाना की पुलिस सुदीश राम को शराब पीने के आरोप में उसके घर से पकड़कर थाने ले गई थी। परिवार का आरोप है कि थाने की हाजत में उसके साथ मारपीट की गई। इसके अगले दिन यानी 30 तारीख की सुबह परिजन उससे मिलने थाने पहुंचे। इसी दौरान परिजनों ने थाना प्रभारी पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है।
परिजनों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे इतनी बड़ी रकम दे सकें। रुपये देने में असमर्थता जताने के बाद वे थाने से वापस लौट गए। परिवार के मुताबिक, उसी दिन रात करीब दस बजे कोटवा थाना से उनके पास फोन आया कि सुदीश राम सदर अस्पताल में भर्ती है और वहां जाकर उससे मिल लें।
रात दस बजे अस्पताल पहुंचने की मिली सूचना, आईसीयू में हुई मौत
परिजनों के अनुसार, थाने से फोन आने के बाद जब वे सदर अस्पताल पहुंचे तो सुदीश गंभीर हालत में मिला। परिवार का दावा है कि उसने थाने में मारपीट किए जाने की बात बताई थी। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
युवक की मौत की सूचना के बाद परिवार और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
चार बेटे और दो बेटियों को छोड़ गया सुदीश
सुदीश राम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके परिवार में चार बेटे और दो बेटियां हैं। इनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि बाकी बच्चे अभी छोटे हैं। परिवार के सामने अब बच्चों के भरण-पोषण का संकट भी खड़ा हो गया है। घटना के बाद परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे। समाचार संप्रेषण तक मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण सदर अस्पताल में जुटे हुए थे।
थानाध्यक्ष बोले- रुपये मांगने और मारपीट का आरोप बेबुनियाद
मामले में कोटवा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पैसे मांगने का आरोप पूरी तरह निराधार है। जब युवक को थाने से मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था, तब भी उसके शरीर में हल्का कंपन था। सदर अस्पताल में मेडिकल जांच कराने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया था। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। थानाध्यक्ष के अनुसार, इसके बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
थानाध्यक्ष ने थाने में मारपीट या किसी कठोर कार्रवाई से भी इनकार किया है। उनका कहना है कि युवक के साथ थाने में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी और परिजनों की ओर से लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
मौत की परिस्थितियों पर उठ रहे सवाल, जांच से खुलेगा घटनाक्रम
इस मामले में परिजनों के आरोप और पुलिस के बयान में स्पष्ट विरोधाभास है। एक तरफ परिवार थाने में कथित मारपीट और रुपये मांगने का आरोप लगा रहा है, वहीं थानाध्यक्ष युवक को मेडिकल जांच के बाद न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि युवक को अस्पताल कब और किन परिस्थितियों में भर्ती कराया गया, मेडिकल जांच में क्या सामने आया तथा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उसकी तबीयत कैसे बिगड़ी। इन सवालों का जवाब मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।
समाचार संप्रेषण तक मृतक के परिजन सदर अस्पताल में ही जमे थे। वो लोग कोटवा थाना पर शव ले जाने की जिद्द पर अड़े थे
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