मोतिहारी: पूर्वी चंपारण में फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उसके माध्यम से ऋण हासिल करने के कथित खेल का पुलिस ने खुलासा किया है। कुंडवाचैनपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक पुरुष और दो नेपाली महिलाएं शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान 12 फर्जी आधार कार्ड, 350 आधार कार्ड बनाने वाले ब्लैंक प्लास्टिक, प्रिंटर, फिंगर स्कैनर, आई स्कैनर और लैपटॉप समेत कई उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पूर्वी चंपारण की ओर से 2 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कुंडवाचैनपुर थाना क्षेत्र में नेपाली नागरिकों का फर्जी आधार कार्ड बनाने और उसके माध्यम से ऋण प्राप्त करने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद वरीय पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई की गई।
CSP की आड़ में चल रहा था फर्जी दस्तावेज बनाने का खेल
पुलिस टीम ने कुंडवाचैनपुर स्थित ग्रामीण बैंक के पास संचालित एक ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) पर छापेमारी की। इस दौरान सीएसपी संचालक मनीष कुमार को गिरफ्तार किया गया। वह उपेंद्र प्रसाद सिंह का पुत्र बताया गया है। इसके साथ ही दो नेपाली महिला आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि नेपाली महिलाओं को रुपये का लालच देकर बहलाया-फुसलाया जाता था। इस मामले में गीता देवी और उत्तराखंड निवासी राकेश कुमार की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इनके माध्यम से महिलाओं का संपर्क सीएसपी संचालक मनीष कुमार से कराया जाता था।
आरोप है कि महिलाओं की पासपोर्ट साइज तस्वीरें राकेश कुमार को भेजी जाती थीं। इसके बाद उनके नाम पर पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले का कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र तैयार कराया जाता था। इसी दस्तावेज का इस्तेमाल आगे फर्जी आधार कार्ड बनवाने में किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, नेपाली महिलाओं की पहचान से संबंधित दस्तावेज तैयार कर उनका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जाता था। फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से ऋण प्राप्त करने की बात भी सामने आई है।
उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक जुड़ रहे तार
इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। नेपाली महिलाओं के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र कहां और किस माध्यम से तैयार कराए गए? पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से जारी बताए जा रहे इन दस्तावेजों की सत्यता क्या है? फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से कितने ऋण लिए गए और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं?
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में गीता देवी और उत्तराखंड निवासी राकेश कुमार की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि जारी विज्ञप्ति में नहीं की गई है। ऐसे में पुलिस की जांच का दायरा बिहार से बाहर तक पहुंच सकता है।
कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में अग्रिम कार्रवाई कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए कितने लोगों की पहचान का दुरुपयोग किया गया और किन वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने की कोशिश हुई। बरामद उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी मिलने की संभावना है।
स्रोत: पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी की प्रेस विज्ञप्ति, दिनांक 02 अक्टूबर 2026।
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