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जानिए क्यों जनसुराज के इस नेताजी को एसपी ने दिखा दी बाहर की राह

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जानिए क्यों जनसुराज के इस नेताजी को एसपी ने दिखा दी बाहर की राह
खबर व संपादन: धीरज श्रीवास्तव

Daily Breakings, Motihari:
मंजर हॉस्पिटल के निदेशक और जनसुराज पार्टी के नेता डॉ. मंजर नसीम, जो पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर के करीबी माने जाते हैं, आज उस वक्त विवाद में फंस गए जब वे एक केस की पैरवी के सिलसिले में मोतिहारी SP स्वर्ण प्रभात के कार्यालय पहुंचे। डॉ. नसीम, जो नरकटिया विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, ने आरोप लगाया कि SP ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें चैंबर से धक्का देकर बाहर निकाल दिया।


डॉ. नसीम के मुताबिक, उन्होंने SP स्वर्ण प्रभात से एक मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने जोर देकर दबाव बनाया, तो SP भड़क गए और उन्हें अपमानित करते हुए चैंबर से बाहर कर दिया। इसके बाद नगर थाना पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, हालांकि बाद में लिखित माफीनामे के आधार पर उन्हें छोड़ दिया गया।


SP का बयान: “बाहर नहीं निकाला, पहचान का सत्यापन किया”
इस घटना पर SP स्वर्ण प्रभात ने अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि डॉ. मंजर नसीम को चैंबर से धक्का देकर बाहर नहीं निकाला गया, बल्कि उनकी पहचान का सत्यापन किया गया था। SP ने कहा, “कई लोग किसी पार्टी, नेता या पदाधिकारी का नाम लेकर आते हैं और दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पहचान का सत्यापन करना हमारी जिम्मेदारी है। आज ही किसी ने मुझे कॉल करके खुद को एक सीनियर पुलिस पदाधिकारी का भाई बताते हुए एक केस में पैरवी की थी। सत्यापन करने पर वह शख्स फर्जी निकला।”
SP ने आगे बताया कि डॉ. नसीम के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने कहा कि पुलिस का मकसद कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी का अपमान करना। सत्यापन के बाद मामला साफ होने पर उन्हें छोड़ दिया गया।

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क्या है पूरा मामला?
डॉ. मंजर नसीम जनसुराज पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं और आगामी नरकटिया विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। आज वे एक अज्ञात केस की पैरवी के लिए SP कार्यालय पहुंचे थे। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है, और जनसुराज समर्थकों ने इसे पुलिस की मनमानी करार दिया है।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि ये रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा था और इसमें कोई बदसलूकी नहीं हुई। फिलहाल, डॉ. नसीम को हिरासत से रिहा कर दिया गया है, लेकिन इस घटना ने मोतिहारी में राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं को हवा दे दी है।

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