मोतिहारी:
पूर्वी चंपारण जिले के एसपी स्वर्ण प्रभात ने साफ कहा है कि अश्लीलता फैलाने वालों से पुलिस अब सख्ती से निपटेगी। इसके लिए अश्लीलता के विरुद्ध अभियान आज से शुरू कर दिया गया है। अभियान शुरू होने के साथ ही सार्वजनकी रूप से महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपमानजनक और अश्लील टिप्पणी करने वालो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने कारवाई शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर भी नजर
एसपी ने कहा है कि पुलिस की सोशल मीडिया और इस तरह के अश्लीलता फैलाने वाले विभिन्न फेसबुक पेज पर भी नजर है। साथ ही ऐसे पेज संचालकों को एसपी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। कहा है कि इस अवधि में ऐसे पेज संचालित करने वाले तुरंत अश्लील पोस्ट हटा लें। अन्यथा कारवाई के लिए तैयार रहे।
एसपी ने जनता से की अपील
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने आम जनता से भी इस बाबत अपील की है। कहा है कि ऐसे तत्वों के बारे में आमलोग उनके सरकारी नंबर 9431822988 पर सीधे व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना दे सकते हैं।
अश्लीलता फैलाने वालों के विरुद्धकड़ी कार्रवाई का है प्रावधान
देश में हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुई, ने पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है। इस नए कानून में सार्वजनिक रूप से अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो सामाजिक मर्यादा और नैतिकता को बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। नीचे बीएनएस की प्रासंगिक धाराओं का विवरण दिया जा रहा है जो इस संदर्भ में लागू होती हैं:
धारा 294 – अश्लील कार्य और गीत:यह धारा सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कार्य करने या अश्लील गीत, शब्द या प्रदर्शन करने को अपराध मानती है। इसमें कोई भी ऐसा व्यवहार शामिल है जो लोक शालीनता को ठेस पहुँचाता हो या दूसरों को परेशान करता हो।
सजा: इसमें तीन महीने तक की कैद, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। उद्देश्य: यह प्रावधान सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता को रोकने के लिए है, जैसे खुले में अश्लील हरकतें करना या अशोभनीय प्रदर्शन।
धारा 295 – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना:यह धारा किसी धर्म या धार्मिक समुदाय की भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने के लिए अश्लीलता फैलाने से संबंधित है। यदि अश्लीलता का प्रयोग धार्मिक अपमान के लिए किया जाता है, तो यह लागू हो सकती है।
सजा: इसमें दो साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। संदर्भ: यह धारा अप्रत्यक्ष रूप से अश्लीलता को नियंत्रित करती है, खासकर जब वह धार्मिक संदर्भ में हो।
धारा 296 – अश्लील कृत्य और व्यवहार:यह धारा विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों को संबोधित करती है। इसमें अश्लील शब्द बोलना, गीत गाना, या ऐसा व्यवहार करना शामिल है जो सार्वजनिक नैतिकता को भंग करता हो।
सजा: पहली बार अपराध करने पर दो साल तक की कैद और 5,000 रुपये तक का जुर्माना; दोबारा अपराध करने पर पांच साल तक की कैद और 10,000 रुपये तक का जुर्माना।
महत्व: यह धारा बीएनएस में नया और सख्त प्रावधान है, जो अश्लीलता को फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की अनुमति देती है।
अन्य संबंधित कानून
हालांकि बीएनएस मुख्य कानून है, लेकिन सार्वजनिक अश्लीलता से निपटने के लिए कुछ अन्य कानून भी सहायक हैं:
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000: धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित करने या प्रसारित करने पर सजा का प्रावधान। पहली बार अपराध पर तीन साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना; दूसरी बार पर पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
धारा 67A: यौन रूप से स्पष्ट सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में फैलाने पर सजा।
महिला अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986: महिलाओं के अश्लील चित्रण को रोकने के लिए प्रावधान।बीएनएस का दृष्टिकोण:बीएनएस में इन धाराओं के जरिए अश्लीलता को न केवल सार्वजनिक स्थानों पर, बल्कि व्यापक सामाजिक संदर्भ में नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। यह आधुनिक चुनौतियों जैसे सोशल मीडिया पर अश्लीलता के प्रसार को भी ध्यान में रखता है, हालांकि इसके लिए IT Act के साथ समन्वय जरूरी है। इन प्रावधानों का लक्ष्य निवारण, सामाजिक सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करना है।
