मोतिहारी: पूर्वी चंपारण में जाली नोट के कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। तुर्कौलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने 4 लाख 95 हजार रुपये के भारतीय जाली नोट के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद नोट 500-500 रुपये के कुल 990 नोट हैं। जिले में जाली करेंसी के पुराने मामलों को देखते हुए इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर नोटों के स्रोत और उनकी सप्लाई चेन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हरसिद्धि के प्रमोद कुशवाहा की गिरफ्तारी से लेकर साइबर कैफे में जाली नोट छापने और नेपाल के रास्ते कथित तस्करी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि 26 अक्टूबर को संध्या गश्ती के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ व्यक्तियों द्वारा भारतीय जाली नोटों का हेरफेर किया जा रहा है। सूचना के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए सदर-1 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दिलीप कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने सेमरा स्टेशन के समीप वाहन जांच शुरू की। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस को देखकर एक व्यक्ति भागने में सफल रहा, जबकि दूसरे को पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार आरोपित की पहचान बंजरिया थाना क्षेत्र के जनरवा गांव निवासी शेख अयनुल, पिता शेख मजीर, के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके पास से 4,95,000 रुपये के भारतीय जाली नोट बरामद किए गए। पुलिस ने नोटों को जब्त कर लिया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
बरामदगी एक नजर में
🔴 कुल जाली नोट: 4,95,000 रुपये
🔴 नोट का मूल्यवर्ग: 500 रुपये प्रति नोट
🔴 कुल नोट: 990
🔴 गिरफ्तार आरोपित: शेख अयनुल
🔴 कार्रवाई का स्थान: सेमरा स्टेशन के समीप, तुर्कौलिया
हरसिद्धि के प्रमोद कुशवाहा की गिरफ्तारी भी रही थी चर्चा में
पूर्वी चंपारण में जाली करेंसी का मामला नया नहीं है। 2011 की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हरसिद्धि थाना क्षेत्र के यादवपुर गांव में खुफिया एजेंसियों ने प्रमोद कुशवाहा को गिरफ्तार किया था। उस समय की रिपोर्ट में उसके पास से जाली भारतीय मुद्रा, पासपोर्ट और नेपाली सिम कार्ड बरामद होने का उल्लेख किया गया था। उसे कथित तौर पर नेपाल के रास्ते जाली नोटों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क से जुड़ा बताया गया था।
हालांकि, उस पुराने मामले और तुर्कौलिया में हुई ताजा गिरफ्तारी के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। पुराने मामले का उल्लेख जिले में जाली करेंसी से जुड़े मामलों के इतिहास के संदर्भ में किया जा रहा है।
साइबर कैफे में छपाई से लेकर नेपाल कनेक्शन तक
जुलाई 2022 में छतौनी थाना क्षेत्र में पुलिस ने चार आरोपितों को आठ लाख रुपये के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में लैपटॉप, प्रिंटर और कागज भी बरामद किए गए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीपरा स्थित एक साइबर कैफे में जाली नोटों की छपाई की जा रही थी। यह मामला स्थानीय स्तर पर नकली करेंसी तैयार करने के आरोपों के कारण चर्चा में आया था।
सितंबर 2024 में बंजरिया थाना क्षेत्र के खड़वा पुल के पास 1.95 लाख रुपये के जाली नोटों के साथ तीन लोगों की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी। उस मामले की रिपोर्टों में नेपाल के रास्ते नोट लाने की बात कही गई थी। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि जिले में अलग-अलग समय पर जाली करेंसी से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। लेकिन सभी मामलों को एक ही गिरोह से जोड़ने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।
2026 में भी सामने आए जाली नोटों के मामले
इस साल भी जिले में जाली नोटों से संबंधित कई कार्रवाइयों की खबरें प्रकाशित हुई हैं। मार्च 2026 में कोटवा क्षेत्र में दो युवकों को 100-100 रुपये के छह संदिग्ध जाली नोटों के साथ पकड़े जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं, जुलाई 2026 में भोपतपुर क्षेत्र में चार आरोपितों की गिरफ्तारी और 1.01 करोड़ रुपये के संदिग्ध जाली नोटों की बरामदगी की खबर प्रकाशित हुई थी। उस मामले में नकदी और अन्य सामान बरामद होने का भी उल्लेख था।
इन मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट और तुर्कौलिया कांड से इनके किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। फिलहाल, अलग-अलग समय पर हुई इन कार्रवाइयों के बाद जाली नोटों की सप्लाई के स्रोत और उन्हें बाजार में खपाने के तरीकों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।
अब जांच के केंद्र में ये सवाल
• तुर्कौलिया में बरामद नोट कहां से लाए गए थे?
• मौके से फरार व्यक्ति की पहचान और भूमिका क्या है?
• क्या नोटों को जिले के बाजारों में खपाने की योजना थी?
• क्या गिरफ्तार आरोपित के संपर्कों से किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क का पता चलता है?
• क्या बरामद नोटों की फॉरेंसिक जांच से उनके स्रोत के बारे में सुराग मिल सकता है?
इस कार्रवाई में सदर-1 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दिलीप कुमार, तुर्कौलिया थानाध्यक्ष रजनीकांत कुमार सहित पुलिस पदाधिकारी और कर्मी शामिल थे। छापेमारी दल में जिला आसूचना इकाई तथा सशस्त्र बल के जवान भी शामिल रहे।
पुलिस अब फरार दूसरे व्यक्ति की पहचान और जाली नोटों के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि नोट कहां से लाए गए थे और इन्हें बाजार में खपाने की क्या योजना थी। जिले में पहले सामने आए मामलों को देखते हुए इस बार जांच का महत्वपूर्ण पहलू नोटों की सप्लाई चेन और संभावित सहयोगियों की पहचान करना होगा। हालांकि, जांच के नतीजे सामने आने तक पुराने मामलों और ताजा गिरफ्तारी के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया जा सकता।







