मोतिहारी: केसरिया नगर पंचायत की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले रजनीश कुमार पाठक उर्फ रिंकू पाठक के ठिकानों पर मंगलवार को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की छापेमारी शुरू होते ही उनकी राजनीतिक यात्रा और पुराने विवाद फिर चर्चा में आ गए हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईओयू की टीमों ने रिंकू पाठक और उनकी पत्नी, केसरिया की मुख्य पार्षद किरण देवी से जुड़े चार ठिकानों पर तलाशी शुरू की है। एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ज्ञात आय से 3 करोड़ 56 लाख 65 हजार 118 रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिले हैं। यह राशि ज्ञात आय से करीब 124.81 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 29/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) में मामला दर्ज किया गया है। तलाशी के लिए पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय से वारंट लिया गया है। ईओयू की टीम केसरिया बाजार में पेट्रोल पंप के पास स्थित निजी आवास, युवराज गैस एजेंसी के कार्यालय और गोदाम, नगर पंचायत भवन स्थित मुख्य पार्षद कार्यालय तथा पटना के दानापुर स्थित बालाजी नगर के पार्क वेस्ट अपार्टमेंट के फ्लैट बी-101 में तलाशी ले रही है।
ईओयू की कार्रवाई के मुख्य बिंदु
- ज्ञात आय से 3,56,65,118 रुपये अधिक संपत्ति का प्रथमदृष्टया साक्ष्य
- आय से करीब 124.81 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आकलन
- आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 29/26 के तहत मामला
- केसरिया और पटना के चार ठिकानों पर तलाशी
नगर पंचायत की राजनीति से विधानसभा चुनाव तक का सफर
रिंकू पाठक की राजनीतिक यात्रा केसरिया नगर पंचायत से शुरू होकर विधानसभा चुनाव तक पहुंची। जून 2019 की एक समाचार रिपोर्ट में उन्हें नगर पंचायत का मुख्य पार्षद बताया गया था। स्थानीय निकाय की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई। वह जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के टिकट पर केसरिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनाव परिणाम में उन्हें 7,217 वोट मिले, लेकिन वह जीत दर्ज नहीं कर सके।
वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव में रिंकू पाठक ने फिर नगर पंचायत की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने वार्ड संख्या सात से चुनाव लड़ा और चंदन कुमार को 411 वोटों से हराया। इसके बाद वह वार्ड पार्षद बने। इसी चुनाव में उनकी पत्नी किरण देवी ने मुख्य पार्षद पद पर जीत दर्ज की। किरण देवी को 4,590 वोट मिले थे और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी राजकुमार प्रसाद को 2,440 वोटों से पराजित किया था। वर्तमान में रिंकू पाठक वार्ड पार्षद और उनकी पत्नी किरण देवी केसरिया नगर पंचायत की मुख्य पार्षद हैं।
इस तरह दंपती की नगर निकाय की राजनीति में सक्रिय भूमिका बनी रही। रिंकू पाठक का राजनीतिक सफर मुख्य पार्षद पद से विधानसभा चुनाव की दावेदारी और फिर वार्ड पार्षद तक पहुंचा, जबकि उनकी पत्नी मुख्य पार्षद की कुर्सी पर पहुंचीं। जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री के मोतिहारी कार्यक्रम को लेकर केसरिया से लोगों की भागीदारी की अपील संबंधी खबरों में भी रिंकू पाठक का उल्लेख हुआ था। स्थानीय भाजपा और एनडीए से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता की खबरें भी प्रकाशित हुई थीं।
ठेकेदार रंजीत सिंह हत्याकांड में भी आया था नाम
रिंकू पाठक का नाम वर्ष 2021 में ठेकेदार रंजीत सिंह हत्याकांड को लेकर भी सुर्खियों में आया था। तत्कालीन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी सूरज महतो ने पुलिस पूछताछ में रिंकू पाठक और पप्पू कुशवाहा पर रंजीत सिंह की हत्या की सुपारी देने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में रंजीत सिंह की पत्नी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में भी रिंकू पाठक का नाम होने का उल्लेख किया गया था।
ठेकेदार रंजीत सिंह की हत्या के बाद सामने आए इन आरोपों ने उस समय जिले की राजनीति और अपराध जगत में हलचल पैदा की थी। रिंकू पाठक का नाम इस मामले से जुड़ी खबरों में आने के बाद उनकी राजनीतिक पहचान के साथ पुराने विवादों की भी चर्चा होती रही है।
मुकेश पाठक से करीबी को लेकर भी चर्चा
उत्तर बिहार के चर्चित अपराधियों में शामिल मुकेश पाठक का नाम हत्या, रंगदारी और अन्य आपराधिक मामलों में आता रहा है। रिंकू पाठक को मुकेश पाठक का करीबी बताया जाता रहा है। ठेकेदार रंजीत सिंह हत्याकांड से जुड़ी रिपोर्टों और इस कथित संबंध को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा है।
अब संपत्ति के स्रोत की पड़ताल
ईओयू की मौजूदा कार्रवाई का मुख्य आधार ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला है। जांच में संपत्ति के दस्तावेज, बैंक खातों, कारोबारी लेनदेन, निवेश और आय के स्रोत से जुड़े रिकॉर्ड अहम होंगे। युवराज गैस एजेंसी के कार्यालय और गोदाम को भी तलाशी के दायरे में रखा गया है।
ईओयू ने तलाशी पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी जारी करने की बात कही है। प्रारंभिक जांच में 3.56 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का उल्लेख इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। तलाशी में मिलने वाले दस्तावेजों और एजेंसी की विस्तृत रिपोर्ट से संपत्तियों के स्रोत तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की तस्वीर स्पष्ट होगी।






