EXCLUSIVE CRIME REPORT | पूर्वी चंपारण
रक्सौल में पाकिस्तानी एजेंट से जुड़े नेटवर्क का खुलासा, दो गिरफ्तार
भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट बनवाने का आरोप, OTP और भुगतान के डिजिटल साक्ष्य मिलने का पुलिस का दावा
2 मोबाइल बरामद
डिजिटल जांच जारी
मोतिहारी: भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट बनवाना, OTP उपलब्ध कराना और इसके बदले पैसे लेना। पूर्वी चंपारण के रक्सौल में सामने आए इस मामले में पुलिस की जांच पाकिस्तानी एजेंट से कथित संपर्क तक पहुंची है। विजयवाड़ा पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर रक्सौल में संयुक्त कार्रवाई कर दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपितों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। मोबाइल की जांच में OTP से संबंधित डेटा और कथित भुगतान के साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आई है।
भारतीय नंबर, पाकिस्तानी संपर्क और पैसों का लेनदेन
पुलिस के अनुसार, रक्सौल बाजार के कुछ लोगों द्वारा भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट बनवाने के लिए पाकिस्तानी एजेंट को OTP उपलब्ध कराए जाने की सूचना मिली थी। आरोप है कि इसके बदले पैसे दिए जा रहे थे। इन अकाउंट्स का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों में किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।
मामले की कड़ी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में दर्ज कांड संख्या 01/2026 के अनुसंधान से जुड़ी है। वहां की पुलिस से सूचना मिलने के बाद रक्सौल पुलिस के साथ संयुक्त टीम बनाई गई। इसके बाद रक्सौल थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर दोनों युवकों को पकड़ा गया।
पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन में मिले डिजिटल डेटा और कथित भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपितों ने कितने मोबाइल नंबरों पर अकाउंट बनवाए, इन अकाउंट्स को किसने इस्तेमाल किया और उनके जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया।
गिरफ्तार आरोपित
01. आदित्य पांडेय
पिता बलिराम पांडेय, निवासी नागा रोड, थाना रक्सौल, जिला पूर्वी चंपारण।
02. राजा कुमार
पिता सुरेश साह, निवासी हरलाखी, जिला मधुबनी; वर्तमान पता रक्सौल, जिला पूर्वी चंपारण।
डिजिटल जासूसी के नेटवर्क की जांच
इस मामले में जांच का सबसे अहम पहलू भारतीय मोबाइल नंबरों पर बनाए गए WhatsApp अकाउंट्स का वास्तविक इस्तेमाल है। डिजिटल अकाउंट्स के जरिए संपर्क स्थापित करने, पहचान छिपाने या किसी अन्य उद्देश्य से गतिविधियां संचालित करने की आशंका होने पर अकाउंट की गतिविधियों, संपर्कों और भुगतान के स्रोत की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित नेटवर्क का विस्तार कितना था और आरोपितों की भूमिका किस स्तर तक थी। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच, डिजिटल संपर्कों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कड़ियों का पता लगाया जा सकता है।
जांच के घेरे में पांच बड़े सवाल
- कितने भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट बनाए गए?
- कथित पाकिस्तानी एजेंट से संपर्क किस माध्यम से हुआ?
- अकाउंट बनवाने के बदले भुगतान किसने किया?
- क्या इन अकाउंट्स का इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी जुटाने में हुआ?
- क्या नेटवर्क में अन्य स्थानीय या बाहरी लोग भी शामिल हैं?
आंध्र प्रदेश के काउंटर इंटेलिजेंस सेल की अलग कार्रवाई पर अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने 23 अक्टूबर 2026 को डिजिटल माध्यमों के जरिए संवेदनशील रक्षा संबंधी जानकारी जुटाने की कथित कोशिशों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से रक्सौल में गिरफ्तार दोनों युवकों के मामले को उस कार्रवाई से सीधे जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता।
रक्सौल मामले में फिलहाल पुलिस की जांच कथित पाकिस्तानी संपर्क, WhatsApp अकाउंट तैयार कराने, OTP उपलब्ध कराने और भुगतान के साक्ष्यों पर केंद्रित है। नेटवर्क के विस्तार और अन्य लोगों की भूमिका को लेकर आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।






