– शंकरसरैया टिकैता के समीप बोलेरो गाड़ी की टक्कर से जख्मी स्कूटी सवार शिक्षिका को पटना किया गया था रेफर..
– शिक्षिका काजल का बाया हाथ काटने का चिकित्सकों ने दिया है सलाह
– 25 अप्रैल को शंकरसरैया टिकैटा के पास स्कूटी मे बोलेरो गाड़ी ने मारी थी टक्कर,
स्कूटी पर सवार दो शिक्षिका हुई थी जख्मी
आशा कुमारी।
मोतिहारी।
मोतिहारी -कोटवा बाईपास पथ मे शंकरसरैया टिकैटा के समीप स्कूटी मे. बोलेरो गाड़ी की टक्कर से जख्मी शिक्षिका काजल का इलाज पटना एम्स मे किया जा रहा है। जहाँ शिक्षिका काजल की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वह ढाका के भंडार गाँव की रहने वाली है। उसके बाये हाथ को काटने का सलाह चिकित्स्कों ने दिया है। जख़्मी शिक्षिका कोटवा प्रखंड के एनपीएस कोइरगवा हरिजन टोली स्कुल मे पदस्थापित है। जबकि उसके साथ जख्मी शिक्षिका पल्लवी राज का इलाज मोतिहारी मे किया जा रहा है. पल्लवी तुरकौलिया के एनपीएस गहिरिपुर माधोपुर मे पदस्थापित है। जैसे ही इस दर्दनाक खबर की सूचना शिक्षा विभाग तक पहुंची, विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) एस. सिद्धार्थ ने मानवीयता और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण पेश किया। अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद वे स्वयं पटना डीईओ संजय कुमार के साथ एम्स पटना पहुंचे, जहां उन्होंने न सिर्फ घायल शिक्षिका का हालचाल जाना, बल्कि एम्स के निदेशक, डिप्टी डायरेक्टर और डॉक्टरों को विशेष निर्देश दिए कि काजल कुमारी के इलाज में कोई कमी न रहे।
एसीएस एस. सिद्धार्थ ने मौके पर ही पटना डीईओ को आदेश दिया कि वे हर दिन शिक्षिका की स्थिति की रिपोर्ट दें और परिजनों को हरसंभव सहायता दी जाए। काजल कुमारी के पिता और परिजन इस कठिन घड़ी में जब टूटे हुए थे, तब शिक्षा विभाग के इस भरोसे और समर्थन ने उन्हें हिम्मत दी।
एस. सिद्धार्थ ने अपने आचरण से यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा विभाग अपने शिक्षकों को सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह मानता है। कठिन समय में शिक्षकों के साथ खड़े रहने की उनकी यह पहल न सिर्फ विभाग की गरिमा को बढ़ाती है, बल्कि सभी शिक्षकों के दिलों में एक गहरा भरोसा भी जगाती है कि “हम अकेले नहीं हैं।”
आज जब काजल कुमारी जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं, तो उनके साथ शिक्षा विभाग की यह संवेदनशीलता एक उम्मीद की किरण बनकर खड़ी है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविन्द पाण्डेय, सचिव शिव कुमार यादव, शिक्षक ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा की शिक्षिका के साथ पूरा शिक्षक समाज खड़ा ह।
