कोटवा: एक चौंकाने वाले मामले में सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. हारून रशीद के खिलाफ कोटवा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। वजह? पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार न करना! यह मामला तब शुरू हुआ, जब 8 मार्च को गढ़वा के पास अफसर मंसूरी के 17 साल के बेटे असलम उर्फ भोला की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा, जहां डॉ. हारून ने पोस्टमार्टम तो किया, लेकिन रिपोर्ट लिखने से साफ इनकार कर दिया।
थानाध्यक्ष ने लगाई गुहार, फिर भी नहीं बनी बात
कोटवा थानाध्यक्ष राजरूप राय खुद सदर अस्पताल पहुंचे और डॉ. हारून से रिपोर्ट देने की अपील की, ताकि हत्यारों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई हो सके। लेकिन डॉक्टर ने टस से मस नहीं की। थक-हारकर थानाध्यक्ष ने सिविल सर्जन से शिकायत की, पर वहां भी कोई हल नहीं निकला। आखिरकार, एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर थानाध्यक्ष ने सिविल सर्जन को आवेदन देकर डॉ. हारून के खिलाफ FIR की मांग की। सिविल सर्जन ने इस पर “नो ऑब्जेक्शन” लिखकर हरी झंडी दे दी, और अब डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज हो गया है।
क्या बोले थानाध्यक्ष?
“डॉ. हारून के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।” – राजरूप राय, कोटवा थानाध्यक्ष
डॉक्टर का दावा: जबरन कराया पोस्टमार्टम
डॉ. हारून रशीद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “पोस्टमार्टम के लिए आब्जर्वर की जरूरत थी। डीएस ने डॉ. अतहर हुसैन को आब्जर्वर नियुक्त किया था, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंचे। मुझ पर दबाव डाला गया और बिना आब्जर्वर के पोस्टमार्टम कराया गया। ऐसे में रिपोर्ट लिखना मेरे लिए संभव नहीं।”
आब्जर्वर का जवाब: देरी हो गई, पर…
डॉ. अतहर हुसैन ने सफाई दी, “किसी जरूरी काम से मुझे देर हो गई। जब तक पहुंचा, पोस्टमार्टम हो चुका था। अगर मेरी देरी से दिक्कत हुई, तो डॉ. हारून को उच्च अधिकारियों से संपर्क कर वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए था।”
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला अब सुर्खियों में है। एक तरफ पुलिस हत्यारों को पकड़ने के लिए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, तो दूसरी तरफ डॉक्टर और आब्जर्वर के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही की कीमत कौन चुकाएगा? क्या सचमुच सिस्टम में खामी है या यह सिर्फ बहानेबाजी है?
एसपी बोलें: न्यायालय से आदेश लेकर होगी गिरफ्तारी
इधर, एसपी स्वर्ण प्रभात ने एक बयान जारी कर कहा है कि न्याय में बाधा बनने वाले चिकित्सक की गिरफ्तारी की जाएगी। इसके लिए न्यायालय से जल्द ही आदेश लिया जाएगा।
आपकी राय क्या है?
इस मामले में कौन सही-कौन गलत? क्या डॉक्टर को सजा मिलनी चाहिए या सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत है? कमेंट में बताएं और इस खबर को शेयर करें, ताकि सच सामने आए!
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