रक्सौल (पूर्वी चंपारण): भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल बॉर्डर से 10 नेपाली नागरिकों को डिपोर्ट करने की खबर सामने आई है। इनमें पांच पुरुष और पांच महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें राजस्थान पुलिस ने हिरासत में लेकर यह कार्रवाई की। सूत्रों के मुताबिक, ये सभी लोग तब्लीगी जमात से जुड़े थे और भारत में कथित तौर पर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय प्रशासन और सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि राजस्थान पुलिस ने न तो स्थानीय इमीग्रेशन विभाग को सूचित किया और न ही सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) या रक्सौल थाना पुलिस को कोई जानकारी दी।कैसे शुरू हुआ मामला?जानकारी के अनुसार, ये 10 नेपाली नागरिक पिछले 4 मार्च को रक्सौल बॉर्डर के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद ये लोग राजस्थान के दौसा जिले पहुंचे, जहां पुरुष पापड़दा इलाके की एक मस्जिद में ठहरे, जबकि उनकी पत्नियां दौसा में अलग-अलग घरों में रह रही थीं।
दौसा पुलिस को इनके खिलाफ गुप्त सूचना मिली कि ये लोग अवैध और भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने इन्हें हिरासत में लिया और भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत ‘लीव इंडिया नोटिस’ जारी किया। इसके बाद इन्हें रक्सौल बॉर्डर लाया गया और डिपोर्ट कर दिया गया।कौन हैं डिपोर्ट किए गए लोग?डिपोर्ट किए गए लोगों की पहचान नेपाल के बारा और गोरखा जिलों के निवासियों के रूप में हुई है। इनमें शामिल हैं:हरिहरपुर गांव के मोहम्मद जान अंसारी और उनकी पत्नी सुलेखा खातूनइनरवा गांव के शहरुद्दीन अंसारी और उनकी पत्नी हलीमा खातूनहरमी गांव के रमजान अली मियां और उनकी पत्नी जफिना खातूनहरिहरपुर गांव के रज्जाक मियां और उनकी पत्नी रखिया धोबिनबड़ी फुलवरिया गांव के मोजाहिर हुसैन और उनकी पत्नी आयसा खातूनस्थानीय अधिकारियों में नाराजगीइस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। एसएसबी 47वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कृष्णन ने कहा, “हमें राजस्थान पुलिस की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। इमीग्रेशन विभाग और रक्सौल थाना भी इस मामले से अनजान है।” रक्सौल थानाध्यक्ष ने भी इस बात की पुष्टि की कि उन्हें इस ऑपरेशन की कोई जानकारी नहीं थी। इससे सीमा क्षेत्र में समन्वय की कमी उजागर हुई है।दौसा पुलिस का बयानदौसा के डीएसपी रविप्रकाश शर्मा ने गिरफ्तारी के समय बताया था, “कुछ विदेशी नागरिक दौसा और पापड़दा क्षेत्र में प्रतिबंधित धार्मिक गतिविधियों में शामिल थे। जांच के बाद इन्हें हिरासत में लिया गया और गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।” उनके मुताबिक, ये लोग देश में अवैध रूप से संदिग्ध गतिविधियां चला रहे थे।क्या है पूरा मामला?ये घटना भारत में अवैध प्रवेश और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। फिलहाल, डिपोर्ट किए गए लोगों के खिलाफ नेपाल में कोई कार्रवाई होगी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिली है।

DailyBreakings पर और अपडेट के लिए बने रहें।
