– जनसंवाद में समर्थकों ने कहा – नहीं मिला टिकट तो अपने पैसों से निर्दलीय लड़ाएंगे चुनाव
धीरज श्रीवास्तव | हिंद मत
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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। जदयू के युवा नेता दिव्यांशु भारद्वाज ने हाल ही में बापू ऑडिटोरियम में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटाकर स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। छात्र राजनीति से सियासी सफर की शुरुआत करने वाले दिव्यांशु को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। अब उनकी सक्रियता को लेकर जिले की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।कार्यक्रम के दौरान दिव्यांशु ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके भाषण में इशारों-इशारों में कई राजनीतिक संदेश छिपे रहे। समर्थकों की मानें तो यदि पार्टी ने उन्हें मोतिहारी विधानसभा से टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।इधर, भाजपा ने पहले ही वर्तमान विधायक प्रमोद कुमार को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ऐसे में अगर दिव्यांशु मैदान में उतरते हैं तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ना तय है। क्योंकि वोट बैंक का समीकरण बिगड़ सकता है और त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना भी बन सकती है।

जातीय फैक्टर भी अहम
मोतिहारी विधानसभा में भूमिहार समाज की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है। दिव्यांशु भी इसी जाति से आते हैं, जो उन्हें स्वाभाविक तौर पर एक बड़ा समर्थन आधार देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भूमिहार वोट किसी भी दल की जीत-हार का बड़ा फैक्टर है। ऐसे में दिव्यांशु के चुनाव मैदान में आने से समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
अंदरखाने चर्चाएं तेज
भले ही जदयू द्वारा आधिकारिक स्तर पर अभी तक कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन अंदरखाने इस बात की चर्चा तेज है कि दिव्यांशु को टिकट मिल सकता है या वे बगावत कर निर्दलीय दांव आजमा सकते हैं। वहीं भाजपा खेमे में भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि भूमिहार वोट दो हिस्सों में बंट गया तो नुकसान किसे होगा।

यदि दिव्यांशु निर्दलीय उतरते हैं तो उन्हें भूमिहार समाज से स्वाभाविक समर्थन मिल सकता है।कांग्रेस या राजद जैसे दलों के लिए यह मौका बन सकता है कि वोटों के बिखराव से उन्हें अप्रत्यक्ष लाभ मिले।
किसे नुकसान?
भाजपा को सीधा नुकसान होने की संभावना है, क्योंकि प्रमोद कुमार भी भूमिहार वोट पर निर्भर हैं।जदयू को भी नुकसान हो सकता है, अगर पार्टी ने दिव्यांशु को टिकट नहीं दिया।
संभावित समीकरण: प्रमोद कुमार (भाजपा) बनाम जदयू उम्मीदवार दिव्यांशु (निर्दलीय) → त्रिकोणीय मुकाबला।भूमिहार वोटों का बंटवारा तय करेगा किसकी राह आसान और किसकी मुश्किल।
