ग्रामीणों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, मौलिक अधिकार और संवैधानिक कर्तव्यों की दी गई विस्तृत जानकारी।
पूर्वी चम्पारण के मोतिहारी स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के तत्वावधान में 20 सितम्बर 2026 को NPS, बिरता टोला, वार्ड संख्या 29, रघुनाथपुर में एक विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 एवं नागरिकों के मौलिक कर्तव्य’ रहा। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता पूनम कुमारी वर्मा तथा पैरा विधिक स्वयंसेवक उज्जवल कुमार ने उपस्थित लोगों को सरल भाषा में उनके कानूनी अधिकारों, संवैधानिक कर्तव्यों और विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका से अवगत कराया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी अभिलेखों और सूचनाओं तक पहुँच का कानूनी अधिकार देता है। लोग किसी भी सरकारी योजना, निर्माण कार्य, स्वीकृत राशि, कार्यादेश, भुगतान विवरण या लंबित आवेदनों की जानकारी संबंधित लोक सूचना अधिकारी (PIO) से मांग सकते हैं। इसके लिए किसी कठिन कानूनी भाषा की आवश्यकता नहीं होती और न ही सूचना मांगने का कारण बताना जरूरी है। सामान्य मामलों में सूचना उपलब्ध कराने की समय-सीमा 30 दिन तथा जीवन या स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे निर्धारित है।
जागरूकता कार्यक्रम में भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों, जैसे समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा और शोषण के विरुद्ध अधिकारों की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है, तथा मानव तस्करी, बेगार और खतरनाक रोजगारों से बच्चों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों, जैसे राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर चर्चा की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि जरूरतमंद, असंगठित क्षेत्र के कामगार, वरिष्ठ नागरिक, बच्चे और दिव्यांग व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से संपर्क किया जा सकता है। साथ ही NALSA की टोल-फ्री कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 की जानकारी भी लोगों के साथ साझा की गई।

