कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव को नोटिस, नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता को लेकर दायर है याचिका; 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई
मोतिहारी: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू), मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति से जुड़ा मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। कुलपति पद के लिए निर्धारित योग्यता और प्रोफेसर के रूप में आवश्यक अनुभव की शर्त पूरी होने को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत पैरा-वाइज जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया है।
यह मामला CWJC No. 7146 of 2026, डॉ. संदीप पहल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया से संबंधित है। पटना हाईकोर्ट में 17 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत में इसकी सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश के अनुसार, यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से पेश अधिवक्ता ने रिट याचिका में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत पैरा-वाइज जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या-5 प्रो. संजय श्रीवास्तव को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। आदेश में कहा गया है कि नोटिस साधारण डाक तथा रजिस्टर्ड पोस्ट विद एडी (Acknowledgement Due) दोनों माध्यमों से भेजा जाए। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। मामले को अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की शर्त पर सवाल
याचिकाकर्ता डॉ. संदीप पहल की ओर से दायर याचिका में UGC Regulations, 2018 के Clause 7.3(i) का हवाला देते हुए कुलपति पद के लिए निर्धारित प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष के अनुभव की शर्त को लेकर सवाल उठाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 21 मई 2022 को आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून 2022 निर्धारित थी।
याचिका के अनुसार, डॉ. संजय श्रीवास्तव को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की कार्यपरिषद ने 4 अक्टूबर 2012 को CAS के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति की स्वीकृति दी थी। इसके बाद BHU की ओर से 5 अक्टूबर 2012 को पदोन्नति संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि यदि प्रोफेसर पद का अनुभव वास्तविक पदोन्नति अथवा पदभार ग्रहण करने की तारीख से गिना जाए, तो जून 2022 में आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित 10 वर्ष का अनुभव पूरा नहीं होता था। यह याचिकाकर्ता की ओर से उठाया गया कानूनी सवाल है, जिस पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है।
पटना हाईकोर्ट के पुराने फैसले का दिया हवाला
याचिका में पटना हाईकोर्ट के CWJC No. 16680 of 2014, Ram Tawakya Singh बनाम State of Bihar मामले में 18 दिसंबर 2015 को दिए गए फैसले का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस फैसले में कुलपति पद के लिए निर्धारित 10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की शर्त पर विचार किया गया था।
याचिका में दावा किया गया है कि आवश्यक अनुभव वास्तविक कार्य-अनुभव होना चाहिए तथा केवल पूर्वप्रभावी अथवा नोशनल पदोन्नति के आधार पर अनुभव की गणना नहीं की जा सकती। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने कुलपति पद के लिए उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के दौरान प्रोफेसर पद पर वास्तविक कार्य-अनुभव की गणना किए जाने का मुद्दा उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख
याचिका में Union of India v. M. Bhaskar मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से इस फैसले के आधार पर यह तर्क रखा गया है कि केवल नोशनल प्रमोशन की पिछली तारीख के आधार पर आवश्यक अनुभव की गणना नहीं की जानी चाहिए।
हालांकि, अभी हाईकोर्ट ने इन आरोपों या दावों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। 17 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। कोर्ट के आदेश में यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से विस्तृत पैरा-वाइज जवाब के लिए समय मांगे जाने का उल्लेख है।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अब मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी। उस समय संबंधित पक्षों की ओर से जवाब और आवश्यक दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे जाने हैं। कुलपति की नियुक्ति को लेकर याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे की स्थिति हाईकोर्ट की सुनवाई और आगामी आदेशों से स्पष्ट होगी।
नोट: हाईकोर्ट के 17 सितंबर 2026 के उपलब्ध आदेश में इस चरण पर आरोपों की सत्यता अथवा कुलपति की नियुक्ति की वैधता पर कोई अंतिम निष्कर्ष दर्ज नहीं है। आदेश में मुख्य रूप से केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय और प्रतिवादी संख्या-5 को नोटिस जारी करने का निर्देश है।

