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Motihari: 13 करोड़ के पुल पर उद्घाटन के 20 दिन बाद सवाल, एप्रोच रोड में 20 फीट लंबी दरार और धंसाव

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Motihari: 13 करोड़ के पुल पर उद्घाटन के 20 दिन बाद सवाल, एप्रोच रोड में 20 फीट लंबी दरार और धंसाव

खबर: Ratnesh Kumarसंपादन व प्रकाशन: धीरज श्रीवास्तव

मोतिहारी: जिस पुल के शुरू होने पर करीब 10 प्रखंडों की कनेक्टिविटी बेहतर होने और लोगों के आवागमन में समय की बचत का दावा किया गया था, उसके उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही एप्रोच रोड में लंबी दरार सामने आने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बने मजूरहा-हरदिया पुल की एप्रोच सड़क में लगभग 20 फीट लंबी दरार बताई जा रही है। सड़क का एक हिस्सा नीचे की ओर धंस गया है। तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और वे निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं।

उद्घाटन के 20 दिन बाद ही सामने आई खामी

मजूरहा-हरदिया पुल का उद्घाटन एक सितंबर को बापूधाम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया था। करीब 72 मीटर लंबे और साढ़े सात मीटर चौड़े इस पुल को क्षेत्र की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना के तौर पर देखा गया था। पुल के चालू होने से जिला मुख्यालय से जुड़े कई प्रखंडों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद थी।

लेकिन उद्घाटन के करीब 20 दिन बाद ही पुल की एप्रोच रोड में दरार और धंसाव की तस्वीरें सामने आ गईं। सड़क पर करीब 20 फीट लंबी दरार दिखाई देने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही सड़क का हिस्सा नीचे बैठने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

13 करोड़ की परियोजना, फिर इतनी जल्दी क्यों बिगड़ी सड़क?

इस परियोजना पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद यदि उद्घाटन के कुछ ही दिनों में एप्रोच रोड में दरार और धंसाव की स्थिति बनती है तो सवाल केवल सड़क की खराब स्थिति का नहीं, बल्कि निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया का भी है।

आखिर निर्माण के दौरान मिट्टी भराई, सड़क की परत, जलनिकासी और अन्य तकनीकी मानकों की जांच किस स्तर पर हुई? निर्माण पूरा होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था या नहीं? यदि निरीक्षण हुआ था तो उस समय एप्रोच रोड में ऐसी संभावित कमजोरी क्यों नहीं पकड़ी गई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से अपेक्षित है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी, व्यवस्था पर उठाए सवाल

सड़क में दरार और धंसाव सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। स्थानीय रंजीत गिरी, धूमल प्रसाद और राजकिशोर समेत अन्य लोगों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद किसी नई परियोजना की सड़क का इतनी जल्दी खराब होना गंभीर विषय है। लोगों का कहना है कि विकास कार्य केवल उद्घाटन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन भी सुनिश्चित होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ है तो उद्घाटन के इतने कम समय बाद एप्रोच रोड में दरार और धंसाव की स्थिति क्यों बनी, इसकी तकनीकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

तकनीकी जांच से ही साफ होगी असली वजह

हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर दरार और धंसाव के लिए निर्माण एजेंसी को सीधे जिम्मेदार ठहराना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। इसकी वास्तविक वजह मिट्टी की स्थिति, भराई और कॉम्पैक्शन, जलनिकासी, सड़क निर्माण की तकनीक या किसी अन्य तकनीकी कारण से जुड़ी हो सकती है। इसके लिए संबंधित विभाग की तकनीकी जांच जरूरी है।

लेकिन सवाल यह भी है कि यदि कोई तकनीकी कमी नहीं है तो सड़क के धंसने और लंबी दरार की स्थिति क्यों बनी। इसलिए पूरे मामले में मौके का निरीक्षण, गुणवत्ता की जांच और निर्माण से जुड़े अभिलेखों की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

अब निगरानी व्यवस्था की भी होगी परीक्षा

करोड़ों रुपये की परियोजना के निर्माण में विभागीय अधिकारियों, अभियंताओं और निर्माण एजेंसी की अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी होती है। ऐसे में एप्रोच रोड की मौजूदा स्थिति सामने आने के बाद अब निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर दरार और धंसाव की तकनीकी जांच कराए तथा यह सार्वजनिक करे कि समस्या किस कारण से हुई। यदि जांच में निर्माण सामग्री, कार्यप्रणाली या निर्धारित मानकों में किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उद्घाटन के समय दिखाया गया था बेहतर कनेक्टिविटी का सपना

मजूरहा-हरदिया पुल को क्षेत्र में आवागमन सुगम बनाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा गया था। इसके चालू होने से जिला मुख्यालय और आसपास के प्रखंडों के बीच दूरी और यात्रा समय कम होने की उम्मीद थी। ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह पुल सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी सुविधा है।

ऐसे में पुल की एप्रोच रोड की शुरुआती स्थिति को लेकर उठे सवालों का समय रहते समाधान जरूरी है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले को महज मरम्मत तक सीमित रखता है या निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी की भी जांच कराता है।

जवाब का इंतजार

मामले में संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल करीब 13 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में उद्घाटन के महज 20 दिन बाद सामने आई दरार और धंसाव ने निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और सरकारी परियोजनाओं के रखरखाव को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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