ढाका में दो मनरेगा योजनाओं की जांच में खुली पोल, मौके पर एक भी मजदूर नहीं मिला; मेट का मोबाइल दूसरे व्यक्ति के पास, एक आरोपित पुलिस हिरासत में
मोतिहारी/ढाका: पूर्वी चंपारण जिले के ढाका प्रखंड में एनएमएमएस क्लोन के जरिए मजदूरों की फर्जी हाजिरी बनाने और सरकारी राशि के गबन की आशंका का मामला सामने आया है। दो सरकारी योजनाओं की जांच के दौरान कार्यस्थल पर एक भी मजदूर नहीं मिला, जबकि मोबाइल ऐप पर लगातार मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। मामले में उप विकास आयुक्त के स्तर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने एक आरोपित लालबाबू पासवान को हिरासत में लिया है।
मामला ढाका प्रखंड की करमावा ग्राम पंचायत और बहलोलपुर गांव में संचालित वीबी-जी राम जी योजना से जुड़ा है। 18 अक्टूबर 2026 को अनुमंडल पदाधिकारी, सिकरहना (ढाका) ने दोनों योजनाओं की जांच की। इस दौरान करमावा पंचायत में नए पंचायत भवन के प्रांगण में मिट्टी भराई एवं पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य और बहलोलपुर गांव में बिनोद राम के घर से थागा प्रसाद के घर तक नाला एवं पीसीसी निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया।
जांच में सामने आया कि करमावा की योजना में 11 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 133 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। वहीं, बहलोलपुर की योजना में 15 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 48 मजदूरों की हाजिरी बनाई गई थी। इसके बावजूद जांच के समय दोनों योजना स्थलों पर एक भी मजदूर काम करता नहीं मिला। जांच प्रतिवेदन में ऐप पर फर्जी तरीके से तस्वीरें अपलोड कर उपस्थिति दर्ज करने की बात सामने आई, जिससे सरकारी राशि के गलत भुगतान और गबन की आशंका जताई गई है।
मेट के नाम पर निबंधित मोबाइल दूसरे के पास
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि करमावा पंचायत में मेट के रूप में निबंधित रूपमाला देवी के नाम से पंजीकृत मोबाइल नंबर का इस्तेमाल लालबाबू पासवान कर रहा था। जांच प्रतिवेदन में रूपमाला देवी और लालबाबू पासवान की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मो. रिजवान के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यक्रम पदाधिकारी, ढाका ने तीनों के विरुद्ध स्थानीय थाने में ढाका कांड संख्या 540/26, दिनांक 19 अक्टूबर 2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। लालबाबू पासवान फिलहाल पुलिस हिरासत में है। मामले में पुलिस की जांच जारी है।
सरकारी कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुलिस अनुसंधान में किसी सरकारी कर्मचारी, पदाधिकारी या तकनीकी पदाधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों, कनीय अभियंताओं और पंचायत रोजगार सेवकों को एनएमएमएस ऐप के माध्यम से दर्ज की जा रही मजदूरों की उपस्थिति की नियमित जांच करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में एनएमएमएस क्लोन के जरिए फर्जी हाजिरी का मामला सामने आने पर संबंधित कर्मियों और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अब जांच का अहम पहलू यह होगा कि फर्जी उपस्थिति के आधार पर किसी सरकारी राशि का भुगतान हुआ है या नहीं और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है।
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