पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में विजयादशमी के अवसर पर 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण दहन की परंपरा पूरी की। इस दौरान गांधी मैदान में विजयादशमी का भव्य आयोजन हुआ और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। दशहरा पर्व को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला।

राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में बिहार के कई प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक पदाधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्यपाल सैयद अता हसनैन, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव समेत कई गणमान्य लोग समारोह में पहुंचे। इसके अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेता भी इस आयोजन का हिस्सा बने।
समारोह की शुरुआत भगवान राम और लक्ष्मण के स्वागत के साथ हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने तिलक लगाकर आरती उतारी। इसके बाद मंच पर मौजूद अतिथियों ने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाए। इसी के साथ 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। गांधी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विजयादशमी के पारंपरिक और धार्मिक संदेश को सामने रखा गया।
रावण दहन का दृश्य विजयादशमी समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। गांधी मैदान में होने वाला यह आयोजन पटना के प्रमुख दशहरा कार्यक्रमों में शामिल है। हर साल इस परंपरा के माध्यम से बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया जाता है। रावण के विशाल पुतले का दहन अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म और न्याय की स्थापना की थी। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देशभर में दशहरा के अवसर पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। पटना के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम भी इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है।
विजयादशमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। यह पर्व लोगों को अपने जीवन से अहंकार, अन्याय, असत्य और नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा देता है। रावण दहन के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जाता है कि बुराइयों को समाप्त करने की जिम्मेदारी प्रत्येक व्यक्ति की है।
गांधी मैदान में आयोजित समारोह ने एक बार फिर विजयादशमी के पारंपरिक संदेश को सामने रखा। 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन इस बात का प्रतीक रहा कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, सत्य और धर्म का मार्ग अंततः विजय की ओर ले जाता है। यह पर्व लोगों को सदाचार, न्याय और सकारात्मक विचारों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
विजयादशमी देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दिन रावण दहन के आयोजन के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों और धर्म की स्थापना के संदेश को याद किया जाता है। पटना के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला आयोजन रहा, जिसमें राज्य के प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति भी रही।
संवाददाता तरुण कुमार की रिपोर्ट, गांधी मैदान, पटना से।
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