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Motihari Land Scam: बैरिया सरकारी जमीन मामला: प्रशासन पीछे हटा, रजिस्ट्री पर लगी रोक… अब सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रिया

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DB BREAKINGS EXCLUSIVE | धीरज श्रीवास्तव

मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के बहुचर्चित बैरिया सरकारी जमीन मामले में आखिरकार जिला प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े हैं। DB Breakings द्वारा लगातार उठाए गए सवालों और सामने आए दस्तावेजों के बाद प्रशासन ने संबंधित जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि कार्रवाई फिलहाल निचले स्तर तक ही सीमित नजर आ रही है, जबकि पूरे मामले में निर्णय लेने वाले अधिकारियों और प्रक्रिया संचालित करने वाले जिम्मेदार कर्मियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

क्या हुई कार्रवाई?

  • बैरिया मौजा के खाता संख्या 109 एवं 110 की जमीन की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक।
  • एडीएम कार्यालय में प्रतिनियुक्त डेटा ऑपरेटर मुन्नीलाल को उसके मूल विभाग कृषि विभाग वापस भेजा गया।
  • इससे पहले संबंधित राजस्व कर्मचारी को निलंबित किया जा चुका है।

लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बाकी…

प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जिला स्तरीय समिति ने रोक सूची से जमीन मुक्त करने की अनुशंसा की और जिस प्रक्रिया के आधार पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन की बिक्री हुई, उस प्रक्रिया की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? अब तक समिति के किसी सदस्य या निर्णय लेने वाले अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

रोक सूची से जमीन हटाने की प्रक्रिया क्या कहती है?

राजस्व विभाग की प्रक्रिया के अनुसार किसी भी विवादित या प्रतिबंधित जमीन को रोक सूची से मुक्त करने से पहले संबंधित अंचल कार्यालय से नौ बिंदुओं पर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी जाती है।

इसी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाता है कि संबंधित भूमि—

  • सरकारी है या निजी?
  • भूदान, भू-हदबंदी या बेतिया राज की जमीन तो नहीं?
  • किसी न्यायालय में विवादित तो नहीं?
  • खतियान एवं राजस्व अभिलेख क्या कहते हैं?

रिपोर्ट मिलने के बाद ही जिला स्तरीय समिति अपनी अनुशंसा देती है और अंत में जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद निबंधन विभाग को रोक हटाने का पत्र जारी किया जाता है।

यहीं हुआ सबसे बड़ा खेल?

पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप जिला राजस्व शाखा की कार्यप्रणाली पर लग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्षों से राजस्व शाखा में कार्यरत बड़ा बाबू प्रेम नारायण डसुआ ने रोक सूची से जमीन मुक्त करने से पहले संबंधित अंचल से नौ बिंदुओं पर अनिवार्य जांच रिपोर्ट ही नहीं मंगाई।

यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत मानी जा सकती है, क्योंकि बिना अंचल की रिपोर्ट के किसी भी प्रतिबंधित जमीन को रोक सूची से मुक्त करना गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।

यदि रिपोर्ट नहीं मंगाई गई तो जिम्मेदार कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  • क्या जिला स्तरीय समिति को बिना अंचल रिपोर्ट के प्रस्ताव भेजा गया?
  • क्या समिति को इस बात की जानकारी थी कि नौ बिंदुओं की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है?
  • क्या अनुमोदन से पहले पूरी फाइल का परीक्षण किया गया था?
  • यदि प्रक्रिया अधूरी थी तो रोक सूची से जमीन मुक्त कैसे कर दी गई?

प्रशासन अब रिकॉर्ड खंगालने में जुटा

सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी के निर्देश पर मोतिहारी और चकिया चीनी मिल से जुड़े खतियान, रजिस्टर और अन्य राजस्व अभिलेख जिला रिकॉर्ड रूम से युद्धस्तर पर निकाले जा रहे हैं। प्रशासन पूरे मामले की कानूनी समीक्षा कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध डबल बेंच में जाने की भी तैयारी की जा रही है।

DB Breakings के सवाल

  • क्या खाता संख्या 109 वास्तव में गैरमजरूआ सरकारी भूमि है?
  • अंचल से नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट क्यों नहीं ली गई?
  • यदि रिपोर्ट नहीं थी तो समिति ने निर्णय किस आधार पर लिया?
  • क्या केवल निचले कर्मियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है?
  • जिला राजस्व शाखा में वर्षों से जमे कर्मियों की भूमिका की जांच होगी?

कहानी अभी बाकी है…

बैरिया सरकारी जमीन प्रकरण अब केवल जमीन की रजिस्ट्री का मामला नहीं रह गया है। यह पूरे राजस्व तंत्र की जवाबदेही, निबंधन प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। जिला प्रशासन ने फिलहाल रजिस्ट्री पर रोक लगाकर नुकसान को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की है, लेकिन असली परीक्षा अब यह होगी कि जांच केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहती है या निर्णय लेने वाली पूरी श्रृंखला की जवाबदेही भी तय होती है।


नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों, प्रशासनिक कार्रवाई, संबंधित अभिलेखों एवं विभिन्न पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। यदि संबंधित अधिकारी या विभाग अपना पक्ष देना चाहते हैं तो DB Breakings उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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