मोतिहारी: 2011 की जनगणना में 50 लाख से ज़्यादा आबादी वाले पूर्वी चंपारण में कामकाजी माताओं के छोटे बच्चों के लिए सरकारी पालना घर (आंगनबाड़ी-सह-क्रेच) सिर्फ 2 चल रहे हैं। वहीं पड़ोसी पश्चिम चंपारण में ऐसे 43 केंद्र हैं और पटना में 51। यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 24 जुलाई 2026 को लोकसभा में दिए लिखित जवाब में दी है। शिवहर की सांसद लवली आनंद के अतारांकित प्रश्न संख्या 929 के जवाब में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बिहार के सभी 38 जिलों का ब्योरा सदन के पटल पर रखा था। आंकड़े 20 जुलाई 2026 तक के हैं।
बिहार में 504 पालना घर, आधे से ज़्यादा 8 जिलों में
जवाब के मुताबिक बिहार में 504 आंगनबाड़ी-सह-क्रेच मंजूर हैं और सभी चालू हैं। लेकिन इनका बंटवारा बेहद असमान है। पटना (51), पश्चिम चंपारण (43), मधुबनी (43), सारण (41), सीवान (40), वैशाली (38), गोपालगंज (31) और भोजपुर (30), इन 8 जिलों में ही 317 केंद्र हैं, यानी कुल का करीब 63 प्रतिशत। दूसरी ओर पूर्वी चंपारण समेत 19 जिलों में सिर्फ 2-2 केंद्र हैं, और अररिया में केवल 1। पड़ोसी सीतामढ़ी और शिवहर में भी 2-2 केंद्र ही हैं, जबकि मुजफ्फरपुर में 3।
| जिला | चालू आंगनबाड़ी-सह-क्रेच (20.07.2026 तक) |
|---|---|
| पटना | 51 |
| पश्चिम चंपारण | 43 |
| मधुबनी | 43 |
| सारण | 41 |
| सीवान | 40 |
| मुजफ्फरपुर | 3 |
| सीतामढ़ी | 2 |
| शिवहर | 2 |
| पूर्वी चंपारण | 2 |
| अररिया | 1 |
| बिहार कुल | 504 |
क्या है पालना योजना
केंद्र ने 1 अप्रैल 2022 से मिशन शक्ति के ‘सामर्थ्य’ हिस्से के तहत पालना योजना शुरू की। इसमें 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में ही दिनभर सुरक्षित देखभाल, पोषण आहार, स्वास्थ्य जांच, वृद्धि की निगरानी, टीकाकरण और प्री-स्कूल शिक्षा मिलती है। मंत्रालय के मुताबिक यह सुविधा सभी माताओं के लिए है, चाहे वे नौकरी करती हों या नहीं। हर केंद्र पर एक क्रेच वर्कर और एक क्रेच हेल्पर अतिरिक्त रखे जाते हैं। योजना में केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च उठाते हैं।
मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह ‘मांग आधारित’ योजना है। यानी राज्य सरकार अपनी ज़रूरत का आकलन कर प्रस्ताव भेजती है और प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड (PAB) उसे मंजूर करता है। जिलों में केंद्र कितने खुलें, यह काफी हद तक राज्य और जिला स्तर से भेजी गई मांग पर निर्भर करता है।
मोतिहारी की कामकाजी माताओं के लिए क्यों अहम
पूर्वी चंपारण बिहार के सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में है। यहां खेतों में मजदूरी करने वाली, आंगनबाड़ी-आशा, शिक्षिका, स्वयं सहायता समूह (जीविका) से जुड़ी और छोटे कारोबार करने वाली हज़ारों महिलाएं रोज़ घर से निकलती हैं। छोटे बच्चे की देखभाल का इंतज़ाम न होने पर कई महिलाएं काम छोड़ देती हैं या बच्चों को साथ ले जाने को मजबूर होती हैं। ऐसे में पूरे जिले में सिर्फ 2 पालना घर होना बड़ा सवाल है, खासकर जब पड़ोसी पश्चिम चंपारण में 43 केंद्र चल रहे हैं।
जवाब में यह भी बताया गया कि बिहार में कामकाजी महिलाओं के लिए 3 सखी निवास (पटना, मुजफ्फरपुर और गया में एक-एक), 16 शक्ति सदन और 61 वन स्टॉप सेंटर चालू हैं। पूर्वी चंपारण में सखी निवास नहीं है।
यह आंकड़े जुलाई 2026 के लोकसभा जवाब के हैं। इसके बाद जिले में नए केंद्र खुले हैं या नहीं, इसकी जानकारी जिला प्रशासन से मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी।
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मूल दस्तावेज़: लोकसभा अतारांकित प्रश्न 929 (24.07.2026) का जवाब, PDF
स्रोत: लोकसभा में केंद्र सरकार का लिखित जवाब
