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मोतिहारी में बाढ़ का कहर: घर डूबे तो तटबंध बना ठिकाना, पानी-दवा और बच्चों के दूध की जरूरत

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मोतिहारी : गंडक का पानी अब सिर्फ नदी की धारा तक सीमित नहीं है। पूर्वी चंपारण के कई गांवों में इसने परिवारों की दिनचर्या बदल दी है। घरों में पानी पहुंचने के बाद कोई तटबंध पर शरण लिए है तो कोई ऊंचे स्थान की तलाश में है। राहत और बचाव का काम चल रहा है, लेकिन विस्थापित परिवारों की जरूरत अब सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं रह गई है। बच्चों के लिए दूध, पीने का साफ पानी, बीमारों के लिए दवा, महिलाओं के लिए शौचालय और मवेशियों के लिए चारा जैसी जरूरतें लगातार सामने आ रही हैं।

चटिया गेज पर खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर पानी

गंडक के जलस्तर पर नजर डालें तो अरेराज के चटिया गेज पर 30 सितंबर की सुबह नदी का जलस्तर 69.70 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 69.15 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। उस समय उपलब्ध रियल टाइम आंकड़े में जलस्तर का रुख स्थिर दर्ज किया गया था।

इससे यह तस्वीर सामने आती है कि हर घंटे पानी बढ़ने की स्थिति भले नहीं हो, लेकिन नदी का दबाव अभी भी सामान्य स्थिति में नहीं लौटा है। निचले इलाकों में पहले से जमा पानी और जलजमाव के कारण ग्रामीणों की परेशानी बनी हुई है।

पुछरिया में घर डूबे तो तटबंध बना सहारा

पुछरिया के निचले हिस्सों में कई घरों में तीन से चार फीट तक पानी पहुंचने के बाद परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। बच्चों और मवेशियों के साथ कई परिवार चंपारण तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। अस्थायी ठिकानों में रहने वाले परिवारों के सामने बारिश, धूप और रात गुजारने के साथ-साथ खाने-पीने की व्यवस्था बनाए रखना चुनौती है।

घर में पानी भरने से सिर्फ रहने की समस्या नहीं है। अनाज, कपड़े, बिस्तर और घरेलू सामान भी प्रभावित हुए हैं। पानी उतरने के बाद इन परिवारों के सामने घर की सफाई और खराब हुए सामान को लेकर अलग संकट खड़ा होगा।

राहत पहुंच रही, लेकिन जरूरतों की सूची लंबी

प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई, नाव और मेडिकल कैंप के माध्यम से राहत पहुंचाई जा रही है। लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत का मतलब सिर्फ एक समय का भोजन नहीं है। जिन परिवारों को कई दिनों तक घर से बाहर रहना पड़ रहा है, उनके लिए साफ पेयजल, दवा, बच्चों का दूध, शौचालय और अस्थायी छत जरूरी हो जाते हैं।

मवेशियों को साथ लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे परिवारों के लिए पशुचारा भी महत्वपूर्ण जरूरत है। वहीं बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और पहले से बीमार लोगों के लिए मेडिकल सहायता की जरूरत सामान्य परिवारों की तुलना में अधिक है।

39 हजार से अधिक आबादी प्रभावित

30 सितंबर शाम तक उपलब्ध जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार पूर्वी चंपारण के अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर प्रखंडों की 17 पंचायतों के 27 गांवों की 39,468 आबादी बाढ़ से प्रभावित थी। करीब 3,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई, नाव और चिकित्सा व्यवस्था संचालित किए जाने की जानकारी दी गई है।

ऊपरी इलाके में पानी घटा, लेकिन निचले गांवों की परेशानी बरकरार

बगहा गेज पर 30 सितंबर की सुबह जलस्तर 89.78 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 89.30 मीटर है और उस समय जलस्तर का रुख गिरता हुआ दर्ज किया गया। दूसरी ओर चटिया में नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर थी। इसलिए ऊपरी हिस्से में पानी घटने के संकेत मिलने के बावजूद पूर्वी चंपारण के निचले इलाकों में जमा पानी और जलजमाव को खत्म होने में समय लग सकता है।

पानी उतरने के बाद शुरू होगी दूसरी चुनौती

बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित परिवारों की मुश्किलें खत्म नहीं होंगी। घरों की सफाई, गीले अनाज को बचाना, खराब हुए घरेलू सामान का आकलन, पेयजल की शुद्धता और संक्रमण से बचाव बड़ी चुनौती होगी। जिन परिवारों के घर लंबे समय तक पानी में रहे हैं, उनके सामने वापस लौटकर रहने लायक स्थिति तैयार करना भी आसान नहीं होगा।

फिलहाल गंडक का जलस्तर और राहत व्यवस्था दोनों पर नजर जरूरी है। लेकिन तटबंध पर बैठे परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर लौटने तक बच्चों का दूध, पीने का पानी, दवा, भोजन और सुरक्षित ठिकाना लगातार कैसे मिलता रहे।

गंडक बाढ़ की पूरी कहानी, हमारी लगातार कवरेज

पानी बढ़ने से लेकर गांवों में राहत और प्रशासन की कार्रवाई तक, इस बाढ़ की पूरी तस्वीर हमारी इन रिपोर्टों में पढ़िए।

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बाढ़ की स्थिति बदल रही है। जलस्तर, राहत और प्रभावित इलाकों से जुड़ी नई जानकारी के लिए हमारी लगातार कवरेज देखते रहें।

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