अरेराज/मोतिहारी: गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के बीच पूर्वी चंपारण के अरेराज-संग्रामपुर इलाके में बाढ़ का असर अब सड़क तक पहुंच गया है। संग्रामपुर पथ पर बाढ़ का पानी आने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन की नजर सड़क पर पानी के फैलाव के साथ आसपास के निचले इलाकों पर भी बनी हुई है।
स्थिति को देखते हुए NDRF भी एक्शन मोड में आ गई है। संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य को लेकर टीम को सक्रिय रखा गया है।

सरेया में मनरेगा से बना गाइड बांध टूटा
मिली जानकारी के अनुसार, अरेराज प्रखंड क्षेत्र की सरेया पंचायत में मनरेगा योजना से बनाया गया गाइड बांध मंगलवार की सुबह करीब 3 बजे टूट गया। बांध टूटने के बाद गंडक नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैलने लगा और चंपारण तटबंध पर नदी का दबाव बढ़ गया।
बांध टूटने के बाद पानी घूमकर पड़ोसी मिश्रवलिया पंचायत के कुछ हिस्सों में भी प्रवेश करने लगा है। निचले इलाकों में पानी फैलने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग पर लगाए सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनरेगा से बनाए गए गाइड बांध की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग की ओर से पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के अभियंता ने बांध की सुरक्षा को लेकर अपना हाथ खड़ा कर दिया था।
ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बाद मंगलवार तड़के करीब 3 बजे बांध ध्वस्त हो गया। हालांकि, इस आरोप पर जल संसाधन विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए विभाग पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
गंडक का लेटेस्ट स्टेटस: अरेराज में चेतावनी स्तर से ऊपर पानी
बिहार जल संसाधन विभाग के रियल टाइम फ्लड मॉनिटरिंग आंकड़ों के अनुसार, 29 सितंबर की सुबह 5 बजे चटिया गेज, अरेराज में गंडक नदी का जलस्तर 68.75 मीटर दर्ज किया गया। इस स्थान पर चेतावनी स्तर 68.15 मीटर है। उपलब्ध आंकड़े में नदी का ट्रेंड Rising दर्ज था।
यानी अरेराज क्षेत्र में उस समय गंडक का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर था और बढ़ने की प्रवृत्ति में दर्ज किया गया। वाल्मीकिनगर बराज पर डिस्चार्ज घटने के बावजूद downstream क्षेत्र में पानी के असर को देखते हुए स्थानीय निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
वाल्मीकिनगर बराज से कितना पानी छोड़ा गया?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर बराज से अधिकतम करीब 5.435 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ था। वहीं 29 सितंबर की सुबह 5 से 6 बजे के बीच करीब 2.122 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
इससे बराज स्तर पर पानी के प्रवाह में कमी दिखाई देती है। लेकिन नदी के पानी को downstream इलाकों तक पहुंचने में समय लगता है। इसलिए अरेराज-संग्रामपुर में स्थानीय जलस्तर और पानी के फैलाव की स्थिति को अलग से देखना जरूरी है।
पिछले तीन दिनों में गंडक का ट्रेंड
26 सितंबर: वाल्मीकिनगर बराज पर करीब 2.736 लाख क्यूसेक का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
27 सितंबर: सुबह करीब 4.04 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज हुआ।
28 सितंबर: बराज पर अधिकतम डिस्चार्ज करीब 5.435 लाख क्यूसेक तक पहुंचा।
29 सितंबर सुबह: उपलब्ध रिपोर्ट में डिस्चार्ज करीब 2.122 लाख क्यूसेक दर्ज हुआ।
इस तरह बराज से निकलने वाले पानी में फिलहाल कमी दिखाई दे रही है, लेकिन अरेराज क्षेत्र में गंडक का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर और बढ़ती प्रवृत्ति में दर्ज किया गया था।
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डुमरियाघाट से संग्रामपुर तक प्रशासन की नजर
गंडक के बढ़े जलस्तर को देखते हुए पूर्वी चंपारण में प्रशासनिक निगरानी पहले से बढ़ी हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डुमरियाघाट पहुंचकर गंडक नदी और तटबंधों की स्थिति का जायजा लिया था।
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वहीं तटबंधों की निगरानी और नाइट पेट्रोलिंग को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।
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संग्रामपुर पथ पर अब प्रशासन की निगरानी
संग्रामपुर पथ पर पानी पहुंचने के बाद सड़क पर आवागमन और आसपास के निचले इलाकों में पानी के फैलाव पर नजर रखना प्रशासन के लिए अहम हो गया है। SDO अरेराज का स्थल निरीक्षण इसी स्थिति का जायजा लेने के लिए किया जा रहा है।
NDRF की सक्रियता से किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने की तैयारी भी सामने आती है। स्थानीय लोगों को तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
कवर स्टोरी: आज की बाढ़ नहीं, करीब दो दशक पुरानी कहानी
नोट: नीचे दी गई कहानी 2004 की बिहार बाढ़ और उस दौर की राहत व्यवस्था से जुड़ी पुरानी घटना है। इसका वर्तमान 2026 की अरेराज-संग्रामपुर बाढ़ से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसे मौजूदा बाढ़ की खबर के साथ एक अलग कवर स्टोरी के तौर पर पढ़ें।
बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। लेकिन करीब दो दशक पहले आई एक बाढ़ ने एक युवा IAS अधिकारी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। यह कहानी थी गौतम गोस्वामी की।
2004 की बाढ़ के दौरान पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी गौतम गोस्वामी की प्रशासनिक सक्रियता की चर्चा हुई। प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के उनके प्रयासों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। बाद में इसी बाढ़ राहत व्यवस्था से जुड़े वित्तीय अनियमितता के मामले ने उनके प्रशासनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
2004 की बाढ़ में मिली राष्ट्रीय पहचान
2004 में बिहार में भीषण बाढ़ आई थी। उस दौरान राहत और बचाव अभियान प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती था। गौतम गोस्वामी की सक्रियता की चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची और उन्हें TIME Magazine के ‘Asian Heroes’ में भी शामिल किया गया।
लेकिन बाढ़ का पानी उतरने के बाद राहत सामग्री की खरीद और सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे। बाद की जांच में बाढ़ राहत राशि से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया।
राहत राशि के मामले में जेल गए
इस मामले में गौतम गोस्वामी समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बाद में नवंबर 2006 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली।
इस पुराने मामले में आरोप और न्यायिक निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना एक ही बात नहीं है।
41 वर्ष की उम्र में निधन
जेल से बाहर आने के बाद भी उनकी जिंदगी मुश्किल दौर से गुजरती रही। वे कैंसर से भी जूझ रहे थे। जनवरी 2009 में 41 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
गौतम गोस्वामी की पूरी कहानी आज भी इसलिए चर्चा में आती है क्योंकि एक ही व्यक्ति की सार्वजनिक पहचान में बाढ़ राहत अभियान की प्रशंसा और बाद में उसी राहत व्यवस्था से जुड़ा विवाद—दोनों अध्याय दर्ज हैं।
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अभी किन इलाकों पर नजर?
फिलहाल सरेया, मिश्रवलिया, संग्रामपुर पथ, अरेराज और गंडक से जुड़े निचले इलाकों पर विशेष नजर बनी हुई है। गाइड बांध टूटने के बाद पानी के फैलाव में होने वाला बदलाव और अरेराज गेज पर गंडक के जलस्तर का अगला ट्रेंड आने वाले घंटों में महत्वपूर्ण रहेगा।
DB Breakings संग्रामपुर-अरेराज क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति, गंडक के जलस्तर और प्रशासन की कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
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