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इस अस्पताल में शौच लगने पर बाहर की दौड़ लगाते हैं चिकित्सक व मरीज

सदर अस्पताल परिसर स्थित ओपीडी भवन

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ओपीडी भवन
सदर अस्पताल स्थित ओपीडी भवन

– सदर अस्पताल के ओपीडी में नहीं है शौचालय की व्यवस्था

– करोड़ो की लागत से बीएमएसआइसीएल द्वारा किया गया था भवन का निर्माण

पूर्वी चंपारण: सदर अस्पताल परिसर में बने नए ओपीडी भवन का संचालन शुरू हुए तीन साल से ज्यादा हो गए हैं। लेकिन भवन की स्थिति ऐसी है कि नेचर कॉल आने पर चिकित्सक हो अथवा मरीज या उनके स्वजन सबको बाहर की दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि निर्माण के समय से ही इस भवन में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। जबकि भवन निर्माण के लिए निर्माणकर्ता एजेंसी को सरकार द्वारा करोड़ों की राशि दिए जाने की बात कही जाती है। अमूमन नए ओपीडी भवन में प्रतिदिन एक हजार के करीब मरीज व उनके स्वजन इलाज व जांच को पहुंचते हैं। वहीं भवन में आधा दर्जन से ज्यादा विभागों के ओपीडी का संचालन होता है। ऐसे में ओपीडी के अवधि में कम से कम आधा दर्जन चिकित्सक व दो दर्जन के करीब स्टाफ उक्त भवन में मौजूद रहते हैं। ऐसी परिस्थिति में मरीजों, उनके स्वजनों व चिकित्सकों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है। एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि भवन निर्माण में भारी पैमाने पर अनियमितता हुई है। भवन में शौचालय की व्यवस्था नहीं होना गंभीर बात है। वही भवन के कई हिस्सों से बारिश के दिनों में पानी भी टपकता है।

खुले में होते फारिग: ओपीडी भवन में शौचालय नहीं होने से लोगों को अस्पताल परिसर में ही खुले में फारिग होते देखा जाता है। जिससे अस्पताल की स्वच्छता भी प्रभावित होती है। खासकर सिविल सर्जन कार्यालय के पीछे, पुराने ओपीडी भवन के पास, सदर अस्पताल के मुख्य भवन के पीछे अधिकतर समय लोगों को फारिग होते देखा जा सकता है।

बीएमएसआइसीएल की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल: ओपीडी भवन का निर्माण सरकारी एजेंसी बीएमएसआइसीएल द्वारा किया गया है। एजेंसी द्वारा भवन का निर्माण का निर्माण बिना शौचालय के ही पूरा कर दिया था। जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा शौचालय की व्यवस्था के बाबत सवाल उठाए जाने पर एजेंसी ने भवन से लगे पुराने ओपीडी भवन के एक हिस्से में शौचालय का निर्माण करने की बात कही थी। तब शौचालय निर्माण का कार्य शुरू भी किया गया था। लेकिन कतिपय कारणों से आज तक इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।

वर्जन: ओपीडी भवन में शौचालय का नहीं होना गंभीर मामला है। इस बारे में पड़ताल कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

– डा रवि भूषण श्रीवास्तवसिविल सर्जन, पूर्वी चंपारण

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