सामाजिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और न्यायपालिका से जुड़े देश-दुनिया के प्रमुख घटनाक्रमों का पूरा ब्योरा।
पिछले 24 घंटों में देश और दुनिया में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम दर्ज किए गए हैं। इनमें बिहार में बाढ़ की स्थिति, EPFO वेतन सीमा में बढ़ोतरी, UPI पर नए MDR नियम, अरब सागर में भारत-पाकिस्तान नौसैनिक घटना, वाहन लोन वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और नई दिल्ली में SEMICON India 2026 की शुरुआत शामिल है।
बिहार में बाढ़ के बिगड़े हालात के बीच केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 सितंबर को प्रभावित इलाकों का जमीनी जायजा लिया। राज्य के कई जिलों में बड़ी आबादी प्रभावित हुई है और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का मुख्य ध्यान राहत कार्यों के साथ-साथ फसल क्षति के आकलन, मुआवजा वितरण और पुनर्वास पर केंद्रित है।
सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनिवार्य EPFO कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य पीएफ, पेंशन और बीमा जैसे सामाजिक सुरक्षा दायरे में शामिल किया जा सकेगा। वहीं, डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% MDR लागू करने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, छोटे व्यापारियों, व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान तय किए गए हैं। अगस्त 2026 में UPI पर लगभग ₹29.823 लाख करोड़ मूल्य के 24.5 अरब लेन-देन दर्ज किए गए थे।
न्यायपालिका और कूटनीति के क्षेत्र में भी बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को स्पष्ट किया कि बैंक और NBFC लोन डिफॉल्ट के मामलों में वाहनों की जब्ती के लिए बल प्रयोग नहीं कर सकते। अदालत ने आरबीआई की निष्पक्ष वसूली गाइडलाइंस और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य बताया है। कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब कर अरब सागर में नौसैनिक इकाइयों की टक्कर को लेकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
औद्योगिक क्षेत्र में SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में शुरू हुआ है। इसमें 600 से अधिक प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा, सरकार खाद्य तेलों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए आयात शुल्क में बदलाव और निर्यातकों के लिए RoDTEP व्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए है।

