पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को मृतक के पोते ने शीर्ष अदालत में दी है चुनौती, जदयू से निष्कासन के बाद राजनीतिक रूप से भी घिरे मोकामा विधायक।
बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका पर 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इस जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।
यह मामला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मोकामा में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है। उस समय जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों का काफिला चुनाव प्रचार के दौरान आमने-सामने आ गया था। 30 अक्टूबर 2025 को हुई इस हिंसा में पीयूष प्रियदर्शी के पक्ष में प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। पुलिस जांच और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां सलाखों के पीछे रहते हुए ही उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव में जीत हासिल की थी।
इसके बाद मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को इस मामले में जमानत दे दी थी, जिसके आधार पर वह जेल से बाहर आए थे। अब इस जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मामले में बिहार सरकार ने भी शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर आपराधिक मामलों और जांच से जुड़े तथ्यों को रखा है। इत्तेफाक से 30 अक्टूबर की तारीख दुलारचंद यादव की पहली बरसी भी है, जिसके चलते इस सुनवाई पर पीड़ित परिवार और राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हैं।
कानूनी पचड़े के साथ-साथ अनंत सिंह को राजनीतिक मोर्चे पर भी बड़े झटके लगे हैं। पटना स्नातक सीट पर जदयू उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में जदयू ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इसके अलावा उनकी पत्नी नीलम देवी से उप मंत्री का दर्जा और समिति का पद वापस ले लिया गया है, साथ ही उन्हें 1 नवंबर तक सरकारी बंगला खाली करने का प्रशासनिक नोटिस थमाया गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई अनंत सिंह के कानूनी भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






