मोतिहारी। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड में बाढ़ का दबाव तेजी से बढ़ गया है। सरेया पंचायत के पांडेय टोला के पास मंगलवार अहले सुबह करीब तीन बजे मनरेगा योजना से बना रिंग बांध टूट गया। बांध टूटने के बाद गंडक का पानी आसपास के निचले इलाकों में तेजी से फैलने लगा। ग्रामीणों के अनुसार, पानी दो पंचायतों के दर्जनों गांवों की ओर बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रिंग बांध में सोमवार शाम से ही रिसाव शुरू हो गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग को इसकी जानकारी दी तथा तत्काल बचाव के लिए बैग उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का दावा है कि सूचना और आग्रह के बावजूद जल संसाधन विभाग की ओर से समय रहते बैग उपलब्ध नहीं कराया गया। रात में पानी का दबाव बढ़ा और करीब तीन बजे रिंग बांध टूट गया।
शाम से दिख रहा था रिसाव, रात में बढ़ा दबाव
ग्रामीणों के मुताबिक बांध टूटने से पहले ही उसके एक हिस्से में रिसाव शुरू हो गया था। पानी के लगातार दबाव के कारण रिसाव बढ़ता गया। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर से स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के सामने बांध टिक नहीं सका।
बांध टूटने के बाद पानी खेतों और आबादी वाले इलाकों की ओर तेजी से फैलने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों एकड़ में लगी फसल पानी में डूब गई है, जबकि करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
रिंग बांध टूटने के बाद ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि रिसाव शुरू होने के बाद तत्काल बचाव सामग्री उपलब्ध कराकर बांध को मजबूत करने का काम शुरू किया जाता तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था।
हालांकि, विभाग की ओर से ग्रामीणों के इन आरोपों पर तत्काल क्या जवाब दिया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बांध टूटने की वास्तविक वजह और समय रहते किए गए बचाव कार्यों की स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
गंडक के बढ़े जलस्तर से पहले से था दबाव
गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच चंपारण के कई इलाकों में तटबंधों और रिंग बांधों पर दबाव बना हुआ है। बगहा और बैरिया क्षेत्र में चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की खबरों के बाद अब अरेराज में रिंग बांध टूटने से पूर्वी चंपारण के निचले इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है।
फिलहाल प्रभावित गांवों में पानी तेजी से फैलने के कारण ग्रामीणों के सामने घर, फसल और मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
About The Author
ShriGanesh Kundli · HELIOXEN TECHNOLOGIES

