कृषि अधिकारी के शुरुआती दावे के बाद SDO के कड़े रुख पर हुई जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं।
मोतीहारी में खाद के स्टॉक और खरीद-बिक्री में कथित गड़बड़ी का एक मामला सामने आया है। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के सख्त रुख और बंजरिया अंचलाधिकारी (CO) की मौजूदगी में हुई तीन दिनों की गहन जांच के बाद मामले का पर्दाफाश हुआ है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी अब आरोपी खाद कारोबारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गए हैं।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सदर SDO अरुण कुमार और DSP दिलीप कुमार को बंजरिया के लक्ष्मण चौक स्थित एक गोदाम में कालाबाजारी के मकसद से उर्वरक रखे होने की सूचना मिली। इसके बाद SDO के निर्देश पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सुरेश प्रसाद गोदाम पहुंचे थे और उन्होंने मीडिया में बयान दिया था कि गोदाम पूरी तरह वैध है और स्टॉक भी सही है। हालांकि, मीडिया में सवाल उठने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई, जिसके बाद सदर SDO ने वीडियोग्राफी कराते हुए कड़ाई से जांच के आदेश दिए।
तीन दिनों तक चली मैराथन जांच में कई अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में पाया गया कि जिस गोदाम को पहले सही बताया जा रहा था, वह लाइसेंस में दर्ज पते पर स्थित ही नहीं था। कागजों में लाइसेंस का पता ‘मानसपूरी आजाद नगर’ दर्ज था, जबकि असल में गोदाम वहां से 5 किलोमीटर दूर बंजरिया के लक्ष्मण चौक पर संचालित हो रहा था। इसके अलावा भौतिक सत्यापन के दौरान खाद के रखरखाव में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दुकान का लाइसेंस 10 सितंबर को जारी हुआ था, जबकि 09 सितंबर यानी लाइसेंस मिलने से एक दिन पहले ही 200 से अधिक बोरी यूरिया खाद की बिक्री कर दी गई थी। जांच टीम को दुकानदार द्वारा उर्वरक का स्टॉक और बिक्री रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं कराया गया। यह पूरा मामला ‘मेसर्स मिथलेश कुमार सुनील कुमार (छौड़ादानो)’ नामक थोक खाद विक्रेता के गोदाम से जुड़ा है।
इस खुलासे के बाद यह बात भी सामने आई है कि उक्त दुकान का लाइसेंस पिछले एक साल से समाप्त था, जिसके बावजूद उर्वरक का आवंटन किया जा रहा था। उधर, रक्सौल SDO के निर्देश पर छौड़ादानो BAO ने भी उक्त व्यवसाई के अन्य गोदाम की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी है। फिलहाल सदर SDO के निर्देश के बाद आरोपी कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

