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मुजफ्फरपुर अग्निकांड: मौत का आंकड़ा बढ़कर 7, अस्पताल का लाइसेंस रद्द, 13 अस्पताल सील

मुजफ्फरपुर, 6 जून 2026। बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। ताजा अपडेट के अनुसार इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है और जिले के 13 अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप में सील कर दिया है। 

मुजफ्फरपुर अग्निकांड में मृतकों की संख्या बढ़कर हुई सात, अस्पताल का लाइसेंस हुआ रद्द, 13 अन्य सील

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मुजफ्फरपुर अग्निकांड में मृतकों की संख्या बढ़कर हुई सात, अस्पताल का लाइसेंस हुआ रद्द, 13 अन्य सील

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13 health facilities sealed in Muzaffarpur for violation of fire safety norms

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13 health facilities sealed in Muzaffarpur for violation of fire safety norms

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Massive fire breaks out at Bihar's Muzaffarpur hospital; 4 dead

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'Took off my oxygen mask and ran': 90-year-old recalls escape from hospital fire that killed 5

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कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के निजी प्रसाद हॉस्पिटल के ICU में देर रात भीषण आग लग गई। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और सुरक्षा मानकों में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि ICU में भर्ती कई मरीज धुएं और आग की चपेट में आ गए। 

अब तक की बड़ी बातें

  • मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो चुकी है। 
  • कई मरीज झुलसे, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। 
  • जिला प्रशासन ने प्रसाद हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। 
  • अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर जिले के 13 अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को सील किया गया है। 
  • पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। 

प्रशासनिक कार्रवाई तेज

तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त ने मामले को गंभीर मानते हुए अस्पताल मालिक और प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। 

राजनीतिक घमासान भी शुरू

घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। राजद नेता रोहिणी आचार्या ने आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। 

पीड़ित परिवारों का दर्द

हादसे के बाद कई मार्मिक कहानियां सामने आई हैं। एक पीड़ित परिवार ने बताया कि मरीज के इलाज के लिए जमीन तक बेच दी गई थी, लेकिन अस्पताल में लगी आग ने उनकी उम्मीदें छीन लीं। परिजनों का आरोप है कि हादसे के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से पर्याप्त आपातकालीन व्यवस्था नहीं थी। 

आगे क्या?

प्रशासन ने जिले के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू करने का संकेत दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले पर राज्य सरकार की नजर बनी हुई है और पीड़ित परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया जारी है। 

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