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Saudi Arabia Latest News: तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला, यमन में हूतियों का कब्जा; क्या बढ़ेगा युद्ध का दायरा?

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रियाद/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी अरब के सामने ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर कई ड्रोन से हमला किया गया है। हमले के बाद पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं और पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ड्रोन इराकी क्षेत्र से लॉन्च किए गए थे। रियाद ने इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर फिलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि सऊदी अरब ने साफ किया है कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, नागरिकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

इराक से लॉन्च हुए ड्रोन, सऊदी ने फिलहाल रोका जवाब

सऊदी अरब के आधिकारिक बयान के मुताबिक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को कई ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले में लोगों के घायल होने और कुछ नुकसान की पुष्टि की गई है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार हमला 10 सितंबर की सुबह हुआ था और इसके बाद पाइपलाइन की सुरक्षा जांच के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इराकी प्रधानमंत्री ने सऊदी नेतृत्व से इराकी सरकार को अपनी भूमि से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अवसर देने का अनुरोध किया। इसके बाद रियाद ने फिलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है।

हालांकि हमले के पीछे किस संगठन या देश की सीधी भूमिका है, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 सितंबर को ईरान की संभावित भूमिका की बात कही है। इसे फिलहाल अमेरिकी आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है, क्योंकि सऊदी सरकार की ओर से हमले के जिम्मेदार की अंतिम पुष्टि नहीं की गई है।

क्यों अहम है सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन?

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद रणनीतिक ऊर्जा मार्ग है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के तट पर स्थित यानबू तक पहुंचाती है। इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक खासियत यह है कि इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर तेल को लाल सागर के रास्ते निर्यात कर सकता है।

मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष में इस पाइपलाइन की अहमियत और बढ़ गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल ले जाया जा रहा था। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसी वजह से पाइपलाइन पर हमले और इसके अस्थायी बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में चिंता बढ़ी है। यदि पाइपलाइन लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो सऊदी तेल निर्यात और वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

यमन में हूतियों की बड़ी बढ़त

सऊदी अरब की चिंता सिर्फ तेल पाइपलाइन तक सीमित नहीं है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट पर तेजी से अपनी स्थिति मजबूत की है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया है।

इसके बाद हूती लड़ाकों ने बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र में स्थित रणनीतिक मायुन यानी पेरिम द्वीप पर भी कब्जा कर लिया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

बाब-अल-मंदब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

बाब-अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके जरिए एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने पर जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकती हैं।

यमन में हूतियों की हालिया बढ़त ने इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। हूतियों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से बाब-अल-मंदब क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए जोखिम बढ़ने की आशंका है।

यमन में करीब 50 हजार लोग विस्थापित

यमन के पश्चिमी तट पर हालिया लड़ाई का असर आम लोगों पर भी पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के आंकड़ों के अनुसार करीब 50 हजार लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।

लड़ाई के कारण कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे भोजन, स्वास्थ्य सेवा और दूसरी मानवीय सहायता पहुंचाने में भी मुश्किलें बढ़ी हैं।

क्या पूरा सऊदी अरब युद्ध क्षेत्र बन गया है?

ताजा घटनाक्रम को देखते हुए पूरे सऊदी अरब को युद्ध क्षेत्र कहना सही नहीं होगा। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों, रणनीतिक क्षेत्रों और क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े स्थानों की सुरक्षा को लेकर है।

सऊदी अरब ने पाइपलाइन हमले के बाद तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं की है। हालांकि रियाद ने स्पष्ट किया है कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए वह आवश्यक कदम उठा सकता है।

तेल की कीमतों पर क्या होगा असर?

सऊदी अरब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में उसकी तेल आपूर्ति से जुड़ी किसी बड़ी पाइपलाइन पर लंबे समय तक व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच तेल बाजार की नजर अब पाइपलाइन की बहाली और आगे होने वाले संभावित हमलों पर है। यदि तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग और बीमा लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।

भारत पर क्या हो सकता है असर?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए सऊदी अरब और आसपास के समुद्री मार्गों में लंबे समय तक तनाव रहने पर इसका अप्रत्यक्ष असर भारत पर भी पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर आयात लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा लाल सागर और बाब-अल-मंदब में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से माल ढुलाई और समुद्री बीमा की लागत बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि इसका पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर तत्काल कितना असर पड़ेगा, यह अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और भारत की घरेलू मूल्य नीति पर निर्भर करेगा।

अब पूरी दुनिया की नजर किन तीन घटनाक्रमों पर?

आने वाले दिनों में तीन घटनाक्रम सबसे महत्वपूर्ण होंगे। पहला, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन कितनी जल्दी दोबारा चालू होती है। दूसरा, यमन में हूतियों की सैन्य बढ़त कहां तक पहुंचती है। तीसरा, बाब-अल-मंदब से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही कितनी प्रभावित होती है।

यदि इन तीनों मोर्चों पर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पश्चिम एशिया से बाहर भी देखने को मिल सकता है। वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी।

खास बात: सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हमला, यमन में हूतियों की बढ़त और बाब-अल-मंदब में तनाव आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकते हैं।

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