अधिकारियों ने बंदियों और किशोरों की सुविधाओं, भोजन, स्वास्थ्य और मुफ्त विधिक सहायता की स्थिति का जायजा लिया।
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार अभिषेक कुमार दास ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पुनीत कुमार तिवारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी के साथ केंद्रीय कारा और पर्यवेक्षण गृह का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दोनों संस्थानों के विभिन्न वार्डों का क्रमवार जायजा लिया और वहां रह रहे बंदियों व किशोरों से सीधे बातचीत कर मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली।
केंद्रीय कारा के निरीक्षण के दौरान बंदियों से भोजन की गुणवत्ता, पेयजल, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा, दवाओं की उपलब्धता और परिजनों से मुलाकात की व्यवस्था पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने परिसर, वार्डों, शौचालयों और स्नानागारों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बंदियों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तथा रसोई और वितरण स्थान पर स्वच्छता मानकों का पालन करने को कहा गया।
चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कारा अस्पताल में बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर दवा वितरण और गंभीर स्थिति में उच्चतर चिकित्सा संस्थान भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही बंदियों की अदालत में समय पर पेशी को लेकर निर्देश दिया गया कि किसी भी आरोपी की पेशी अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और भौतिक या वैधानिक रूप से अनुमत माध्यमों से समय पर पेशी कराई जाए।
विधिक सहायता क्लिनिक की कार्यप्रणाली की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने निर्देश दिया कि कोई भी बंदी आर्थिक असमर्थता के कारण विधिक सहायता या अधिवक्ता से वंचित न रहे। सभी पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, पैनल अधिवक्ता और जमानत या अपील से जुड़ी कानूनी जानकारी देने पर बल दिया गया।
इसके पश्चात अधिकारियों ने पर्यवेक्षण गृह, मोतिहारी का निरीक्षण कर वहां रह रहे किशोरों के भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रहने की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि किशोरों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनके पुनर्वास, शिक्षा तथा कौशल विकास के लिए निरंतर प्रयास हों। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों और किशोरों को सुरक्षित, स्वच्छ व मानवीय वातावरण प्रदान करना तथा उनके अधिकारों एवं विधिक सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना रहा।

