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भारत बंद का पूर्वी चंपारण में व्यापक असर, बंद रहीं दवा दुकानें

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मोतिहारी: पूर्वी चंपारण केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को आयोजित भारत बंद का जिलेभर में व्यापक असर देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जिले के केसरिया, चकिया, कोटवा, अरेराज, रक्सौल, ढाका, पकड़ीदयाल और मधुबन समेत छोटे-छोटे बाजारों में भी मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। शहर में मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। खासकर चिकित्सकों के क्लीनिक के आसपास स्थित मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। कई डॉक्टरों ने अपने क्लीनिक तो खोले, लेकिन दवा दुकानें बंद रहने के कारण मरीज पुर्जा लेकर दवा की तलाश में भटकते रहे।

सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों को हुई। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ नर्सिंग होम और अस्पतालों के पास स्थित मेडिकल दुकानों को खोलने की अनुमति संगठन द्वारा दी गई थी।

बंदी को सफल बनाने के लिए संगठन के पदाधिकारी दिनभर शहर में भ्रमण करते रहे। बाद में अस्पताल चौक पर दवा दुकानदारों ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर बंदी के उद्देश्य की जानकारी दी।

संगठन के सचिव ध्रुवदेव नारायण सिंह ने कहा कि कोरोना काल के बाद से सरकार की विभिन्न नीतियों के कारण ऑनलाइन दवा व्यापार और कॉरपोरेट मेडिकल स्टोर को बढ़ावा मिला है। डिस्काउंट के नाम पर बाजार व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा नकली दवाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि दवा को सामान्य व्यापार की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध मानव जीवन से है।

उन्होंने सरकार से मानवता और छोटे दवा व्यवसायियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की। इधर निजी मेडिकल दुकानों के बंद रहने से सदर अस्पताल समेत जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई।

मौके पर अजय कुमार शर्मा, विकास कुमार, अजय सिंह, मुकेश कुमार, सुनील कुमार साहू, श्रीनिवास मिश्र समेत बड़ी संख्या में दवा दुकानदार मौजूद रहे।

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