छपरा (सारण): सारण जिले के गड़खा बाजार से होकर बहने वाली प्राचीन माही नदी (जिसे डाबरा नदी भी कहा जाता है) की बदहाली पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। नदी में कचरा फेंके जाने, नालों का गंदा पानी सीधे गिरने और किनारों पर अवैध अतिक्रमण के मामले में एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ, कोलकाता ने बिहार सरकार और जिलाधिकारी सारण समेत कई पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
किन-किन पक्षों को भेजा गया नोटिस
मिली जानकारी के अनुसार, अधिकरण ने बिहार सरकार, पर्यावरण सचिव, सिंचाई सचिव, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) और जिलाधिकारी, सारण (छपरा) को नोटिस भेजा है। सभी पक्षों से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
यह सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) तथा डॉ. ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने की। पीठ के सामने नीलेश कुमार की ओर से दायर मूल आवेदन संख्या 194/2026/EZ पर विचार हुआ।
खास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता उपस्थित नहीं थे, फिर भी अधिकरण ने आवेदन को खारिज नहीं किया। पर्यावरण से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने कार्यवाही आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
याचिका में क्या है शिकायत
सूत्रों के अनुसार, आवेदन में बताया गया है कि गड़खा बाजार से लेकर बीबीपुर छठ घाट तक नदी के तटबंधों पर हर दिन कई क्विंटल ठोस कचरा और प्लास्टिक डाला जा रहा है। इससे नदी का किनारा कूड़े के ढेर में बदलता जा रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि गड़खा बाजार में पुराने पुल की जगह नया पुल बनाते समय जो डायवर्जन तैयार किया गया था, उसे काम पूरा होने के बाद भी नहीं हटाया गया। इसके कारण नदी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है। ऊपर से आसपास के नालों का दूषित पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे यह ऐतिहासिक नदी अब नाले में बदलने की कगार पर पहुंच गई है।
संयुक्त कमेटी करेगी मौके का निरीक्षण
मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एनजीटी ने एक संयुक्त कमेटी का गठन किया है। इसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), एनएमसीजी, बीएसपीसीबी और जिलाधिकारी सारण के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी नदी और आसपास के इलाके का स्थल निरीक्षण करेगी।
स्थानीय लोगों के लिए यह मामला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि माही नदी गड़खा बाजार और आसपास के इलाके की पहचान से जुड़ी है। अब सबकी नजर संबंधित विभागों के जवाब और संयुक्त कमेटी के निरीक्षण पर टिकी है, जिसके बाद नदी को बचाने की दिशा में आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्रोत: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की कार्यवाही / स्थानीय सूत्र
