मुजफ्फरपुर फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसकी परतें और गहरी होती जा रही हैं। पुलिस और खुफिया विभाग की अब तक की छानबीन में सामने आया है कि फर्जी आधार और पासपोर्ट तैयार कराने वाले इस गिरोह का नेटवर्क देश के 17 राज्यों तक फैला हुआ है। मामले का कथित मास्टरमाइंड एजाज कमर पहले ही गिरफ्तार होकर जेल भेजा जा चुका है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अलग-अलग बैंकों में लगभग 200 यूआईडीएआई आधार ऑपरेटर इस सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन सभी ऑपरेटरों की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और मामले के अनुसंधानकर्ता उनकी पूरी सूची तैयार कर रहे हैं।
कैसे खुला पूरा मामला
इस रैकेट का पर्दाफाश 30 सितंबर को हुआ था। खुफिया विभाग से मिली सूचना के आधार पर नगर थाना पुलिस ने मोतीझील इलाके में स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन सेंटर पर छापा मारा था। उसी दौरान बांग्लादेशी नागरिक बेलाल हसन के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला पकड़ में आया।
छापेमारी में पुलिस ने मौके से साहिल कुमार और शिव कुमार पंडित को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गईं और जांच की सुई आखिरकार एजाज कमर तक पहुंची।
कौन है कथित मास्टरमाइंड
पुलिस जांच के अनुसार एजाज कमर उच्च शिक्षित है और उसने एनआईटी हमीरपुर से एमटेक किया है। वह एक वेंडर के तौर पर विभिन्न बैंकों को आधार ऑपरेटर उपलब्ध कराने का काम करता था। आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए उसने कई राज्यों के बैंकों में अपने लोग बैठा रखे थे।
खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि इन्हीं ऑपरेटरों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज बनाए गए। यही दस्तावेज आगे पासपोर्ट जैसे अहम कागजात बनवाने में इस्तेमाल होने की आशंका है, इसलिए एजेंसियां इसे सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मान रही हैं।
फरार आरोपियों पर शिकंजा
इस मामले में अब तक एजाज कमर समेत चार आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। वहीं छापेमारी के बाद से फरार चल रहे कन्हाई कम्युनिकेशन के संचालक की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस जल्द ही फरार आरोपियों के खिलाफ अदालत से वारंट लेने की तैयारी में है।
डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि अब तक कितने फर्जी दस्तावेज बने और वे किन-किन लोगों तक पहुंचे। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
आम लोगों के लिए भी यह मामला एक चेतावनी है। आधार अपडेट या कोई भी पहचान पत्र बनवाते समय केवल अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं और किसी बिचौलिए के झांसे में न आएं। संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने को दें।
स्रोत: स्थानीय सूत्र
