अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति को लेकर बिहार शिक्षा विभाग की कार्रवाई अब जिलों में तेज हो गई है। मुजफ्फरपुर जिले में 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त हुए 500 से अधिक अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) प्रह्लाद कुमार गुप्ता ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को ऐसे शिक्षकों का पूरा ब्योरा निर्धारित प्रपत्र में 5 नवंबर तक जमा करने का निर्देश दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने 31 मार्च 2015 के बाद अप्रशिक्षित रहते हुए नियुक्त किए गए प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति को नियमों के अनुरूप नहीं माना है और ऐसे मामलों में नियमानुसार सेवा समाप्ति की कार्रवाई करने को कहा है। प्रखंडवार रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित शिक्षकों के मामलों में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया निर्देश
यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के फैसले के आलोक में की जा रही है। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) 2009 लागू होने के बाद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए एनसीटीई के मानकों के अनुसार प्रशिक्षण योग्यता जरूरी कर दी गई थी। केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों को सीमित समय के लिए इस शर्त से छूट दी थी और बिहार के लिए यह छूट 31 मार्च 2015 तक थी। इसी तारीख को अब कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से इस संबंध में पहले ही जिलाधिकारियों को निर्देश भेजे जा चुके हैं। अब जिलों में इसके तहत सूची तैयार करने का काम शुरू हुआ है।
विशिष्ट शिक्षक और प्रधान शिक्षक भी दायरे में
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट के दायरे में वे शिक्षक भी आएंगे जो 31 मार्च 2015 के बाद अप्रशिक्षित रूप में नियुक्त हुए और बाद में सक्षमता परीक्षा पास कर विशिष्ट शिक्षक बन गए। इसी तरह बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की प्रधान शिक्षक परीक्षा पास कर प्राथमिक विद्यालयों में योगदान देने वाले ऐसे शिक्षकों के नाम भी सूची में देने होंगे, जिनकी शुरुआती नियुक्ति कटऑफ तिथि के बाद अप्रशिक्षित के रूप में हुई थी।
विभाग ने साफ किया है कि विद्यालय या प्रखंड स्तर पर किसी शिक्षक की जानकारी छिपाने या अधूरी रिपोर्ट देने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त अनुशासनिक कार्रवाई होगी। जिस प्रखंड में इस श्रेणी का कोई शिक्षक नहीं है, वहां से शून्य प्रतिवेदन देना अनिवार्य होगा।
पुराने शिक्षकों को 2028 तक डीएलएड का मौका
दूसरी ओर, 31 मार्च 2015 से पहले नियमानुसार नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों को राहत दी गई है। उन्हें 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में डीएलएड की योग्यता हासिल करनी होगी। इस समय-सीमा के बाद कोई अतिरिक्त मौका नहीं मिलेगा। वहीं, हाईकोर्ट के मार्च 2024 के आदेश के बाद हटाए गए जिन अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति कटऑफ तिथि से पहले की थी, उन्हें दोबारा सेवा में लेने की प्रक्रिया का भी निर्देश है।
इस फैसले से जिले के सैकड़ों शिक्षक परिवारों में बेचैनी है। प्रभावित शिक्षकों को अपनी नियुक्ति की तारीख, प्रशिक्षण योग्यता और विभागीय आदेश की शर्तें ध्यान से जांच लेनी चाहिए।
स्रोत: स्थानीय सूत्र

