मोतिहारी: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान के बीच शुक्रवार को मोतिहारी में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गांधी चौक के समीप राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा SIR को लेकर पार्टी की आपत्तियां दर्ज कराईं।
राजद का यह प्रदर्शन पार्टी की ओर से बिहार के जिला मुख्यालयों पर आयोजित विरोध कार्यक्रम का हिस्सा था। RJD का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर ले रही है।
गांधी चौक पर जुटे राजद नेता और कार्यकर्ता
मोतिहारी में आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने गांधी चौक के समीप एकत्र होकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और SIR तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आक्रोश जाहिर किया। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले का दहन किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक सह राजद जिलाध्यक्ष मनोज यादव, डा. शमीम, अभिलेख कुमार उर्फ संतोष ओझा, राजेंद्र राम, अरुण यादव, पवन यादव, राहुल यादव, सनोज यादव, प्रधान महासचिव सुरेश सहनी, प्रेम यादव, लालबाबू यादव और अनुराग यादव समेत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
SIR को लेकर RJD और चुनाव आयोग आमने-सामने
राजद के विरोध की प्रमुख वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। पार्टी लंबे समय से इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। RJD का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है और इससे मताधिकार पर असर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर राजद और विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। हाल में चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की खबरें सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हुआ है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन राजनीतिक आरोपों के बीच अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। 24 सितंबर को आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके पूर्व के स्पष्टीकरण को पूरी आयोग की मंजूरी प्राप्त थी।
तेजस्वी यादव ने भी तेज किया हमला
मोतिहारी में RJD का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पिछले कुछ दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर अपने हमले तेज किए हैं।
23 सितंबर को तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया और चुनावी नियमों में किए गए बदलावों से विपक्ष के लिए चुनाव परिणामों को चुनौती देना मुश्किल हुआ है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी उठाई। ये तेजस्वी यादव और RJD के राजनीतिक आरोप हैं।
इसके बाद शुक्रवार को तेजस्वी यादव ने अपने हमले को और आगे बढ़ाते हुए SIR के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने हालिया चुनावों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और दोबारा चुनाव कराने की मांग दोहराई।
विरोध की राजनीति अब जिला मुख्यालयों तक
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध अब दिल्ली और पटना तक सीमित नहीं है। RJD ने 25 सितंबर को बिहार के जिला मुख्यालयों पर पुतला दहन का कार्यक्रम घोषित किया था। इसी क्रम में मोतिहारी में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।
राजद का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन पर स्पष्ट जवाबदेही जरूरी है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक और निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
मोतिहारी में प्रदर्शन से स्थानीय राजनीति गरमाई
मोतिहारी में हुए इस प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। गांधी चौक के समीप हुए पुतला दहन कार्यक्रम में राजद नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए। पार्टी नेताओं ने संकेत दिया कि SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका विरोध आगे भी जारी रह सकता है।
अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की ओर से आने वाले जवाब और विपक्ष की आगे की रणनीति पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। SIR को लेकर उठे सवालों के बीच मोतिहारी में हुआ यह प्रदर्शन फिलहाल बिहार की राजनीति में जारी व्यापक राजनीतिक टकराव की स्थानीय तस्वीर के तौर पर सामने आया है।

