पटना: बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (जब्त) किया गया है। ये संपत्तियां एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं, जिस पर ED के अनुसार कौशिक कुमार कर का नियंत्रण है और वही इसके वास्तविक मालिक हैं।
ED Patna has provisionally attached 5 immovable properties worth ₹2.01 Cr under PMLA, 2002 in connection with the Bihar Constable Recruitment Exam 2023 paper leak syndicate run by M/s NC Print Pvt. Ltd. owned by Kaushik Kumar Kar.
— ED (@dir_ed) October 30, 2026
EOU की FIR से शुरू हुई ED की जांच
ED के आधिकारिक बयान के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। यह FIR भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 468 और आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 के तहत उन टेलीग्राम लिंक, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के खिलाफ दर्ज की गई थी, जिनका इस्तेमाल सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने में हुआ था।
ब्लैकलिस्टेड प्रेस ने डमी कंपनी से लिया ठेका
EOU ने 22 अगस्त 2024 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। ED के अनुसार, ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक कौशिक कुमार कर ने प्रश्नपत्र छापने का ठेका पाने के लिए साजिश रची। उनकी यह प्रेस पहले भी परीक्षा पेपर लीक के मामलों में ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी। इस रोक से बचने के लिए उन्होंने अपने सहयोगियों को डमी डायरेक्टर बनाकर कैलटेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की नई कंपनी खड़ी की।
केंद्रीय सिपाही चयन पर्षद (CSBC), बिहार ने यह ठेका कैलटेक्स को दे दिया, जबकि इस कंपनी के पास छपाई का न तो कोई पुराना अनुभव था और न ही अपना प्रिंटिंग प्रेस। ED का कहना है कि कैलटेक्स ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से ठेका हासिल किया और फिर अनुबंध का उल्लंघन करते हुए छपाई का काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को सौंप दिया।
कोलकाता से पटना लाते समय लीक हुआ पेपर
जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए गए और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले रास्ते में ही दूसरे आरोपियों की मिलीभगत से लीक कर दिए गए। पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इससे बिहार सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
5.9 करोड़ एडवांस, 2.01 करोड़ शेल कंपनियों में घुमाए
ED ने बताया कि कैलटेक्स मल्टीवेंचर्स को 5.9 करोड़ रुपये एडवांस मिले थे। इसमें से कंपनी ने केवल कुछ हिस्सा ही ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा, जबकि 2.01 करोड़ रुपये कई शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर किए गए। ये रकम कोलकाता की उन फर्जी कंपनियों में घुमाई गई, जिनका कोई असली कारोबार नहीं था। फर्जी लेनदेन दिखाकर पैसे का स्रोत छिपाया गया और अंत में इसे नकद में बदल दिया गया, जिससे पैसे का सुराग ही खत्म हो गया।
चूंकि अपराध की कमाई का आगे पता नहीं चल सका, इसलिए ED ने कौशिक कुमार कर के नियंत्रण वाली दूसरी कंपनी एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड की पांच अचल संपत्तियां, उतनी ही कीमत यानी 2.01 करोड़ रुपये के बराबर, अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। ED ने कहा है कि मामले की आगे की जांच जारी है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने
2023 की सिपाही भर्ती परीक्षा रद्द होने से बिहार के लाखों युवाओं को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ी थी। ED की इस कार्रवाई को पेपर लीक कराने वालों की कमाई पर सीधी चोट माना जा रहा है। अस्थायी अटैचमेंट के बाद अब मामला PMLA के तहत न्याय निर्णायक प्राधिकरण के पास जाएगा, जहां इसकी पुष्टि होगी।
आधिकारिक स्रोत: प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आधिकारिक पोस्ट, 30 अक्टूबर 2026
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