पूर्णिया-पटना सीधी रेल लाइन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर कोसी और सीमांचल इलाके की रेल सुविधाओं से जुड़ी कई मांगें उनके सामने रखीं। सांसद ने इस संबंध में रेल मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें राजधानी पटना से सीधा रेल संपर्क, नई वंदे भारत ट्रेन और स्टेशनों के विकास जैसे बिंदु शामिल हैं।
सांसद की इस पहल को क्षेत्र के यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से सीमांचल के लोग राजधानी तक आसान और सीधी रेल यात्रा की मांग करते आ रहे हैं।
राजधानी से सीधा जुड़ाव क्यों जरूरी
पप्पू यादव का कहना है कि पूर्णिया पूरे सीमांचल का सबसे बड़ा कारोबारी और रणनीतिक केंद्र है। कटिहार, अररिया, किशनगंज और कोसी प्रमंडल के लाखों लोगों का रोजमर्रा का आना-जाना पूर्णिया से होकर गुजरता है। इसके बावजूद आज तक पटना और पूर्णिया के बीच कोई सीधा रेल मार्ग नहीं है।
सांसद ने आग्रह किया कि दोनों शहरों के बीच नई रेल लाइन के सर्वे और निर्माण को जल्द से जल्द मंजूरी मिले। उनका तर्क है कि सीधी लाइन बनने से यात्रियों को घुमावदार रास्तों से होकर लंबा सफर तय करने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा। साथ ही उन्होंने बरसों से अटकी जलालगढ़-किशनगंज रेल परियोजना का काम तेज करने की बात भी रखी।
वंदे भारत और वाशिंग पिट का प्रस्ताव
ज्ञापन में सहरसा से सियालदह के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। सांसद के सुझाव के मुताबिक यह ट्रेन सहरसा से चलकर मधेपुरा, मुरलीगंज, बनमनखी, पूर्णिया कोर्ट और कटिहार के रास्ते सियालदह तक जा सकती है। ऐसा होने पर कोसी और सीमांचल के यात्रियों को कोलकाता की ओर तेज और आरामदायक सफर का विकल्प मिल सकेगा।
इसके अलावा पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पर लंबी दूरी की गाड़ियों के रखरखाव के लिए वाशिंग पिट, पिट लाइन और कोचिंग डिपो बनाने की मांग भी की गई। सांसद के अनुसार स्टेशन के आसपास रेलवे की पर्याप्त जमीन मौजूद है, जिसका इस्तेमाल इस बुनियादी ढांचे के लिए किया जा सकता है। माना जाता है कि ऐसी सुविधा मिलने पर यहां से नई लंबी दूरी की ट्रेनें शुरू करने का रास्ता भी आसान हो सकता है।
स्टेशनों के कायाकल्प और ठहराव पर जोर
पप्पू यादव ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूर्णिया कोर्ट और पूर्णिया जंक्शन के पुनर्विकास का काम तेज करने की अपील भी की। स्थानीय यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जानकीनगर स्टेशन पर जनहित एक्सप्रेस (13205/13206) या कोसी एक्सप्रेस (18697/18698) में से किसी एक ट्रेन का नियमित ठहराव देने की मांग भी रखी।
फिलहाल इन मांगों पर रेल मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। अब क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि मंत्रालय इन प्रस्तावों पर क्या फैसला लेता है। अगर ये मांगें पूरी होती हैं, तो सीमांचल और कोसी इलाके की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
स्रोत: स्थानीय सूत्र
