वाराणसी | 14 अक्टूबर 2026
काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने की शिकायत के बाद मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है। इस बीच श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने बुधवार को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर सोना गायब होने और मंदिर का मुख्य शिखर बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से जुड़ी खबरों को भ्रामक बताया है। न्यास के अनुसार, अप्रैल 2026 में शिखर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसे सुरक्षित निकालकर मंदिर के लॉकर में रखा गया है।
मंदिर प्रशासन की सफाई के बावजूद स्वर्ण शिखर पर लगी सोने की प्लेटों को लेकर उठे सवालों ने मामले को चर्चा में ला दिया है। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर कई स्थानों पर सोना नहीं दिखाई देने की आशंका जताई है। हालांकि, सोना चोरी होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मंदिर न्यास ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सितंबर में सामने आई थी सोना गायब होने की आशंका
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी के अधिवक्ता नित्यानंद राय ने सितंबर 2026 में मंदिर में दर्शन के दौरान स्वर्ण शिखर के कुछ हिस्सों में सोने की प्लेटें गायब होने की आशंका जताई थी। उन्होंने दावा किया कि शिखर पर करीब 8 से 10 स्थानों पर सोना दिखाई नहीं दे रहा था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 23 सितंबर 2026 को मंदिर प्रशासन, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और मंदिर न्यास के पदाधिकारियों को इस संबंध में शिकायत भेजी थी। उन्होंने कथित रूप से गायब सोने की स्थिति स्पष्ट करने, संबंधित हिस्सों की जांच कराने और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
शिकायतकर्ता ने सोने की गुणवत्ता की जांच और पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग भी उठाई है। उन्होंने मंदिर में वर्ष 2022 में लगाए गए स्वर्ण आवरण की गुणवत्ता और उसकी मौजूदा स्थिति को लेकर भी सवाल किए हैं। ये सभी शिकायतकर्ता के आरोप और आशंकाएं हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
PMO तक पहुंचा मामला, शिकायतकर्ता ने मांगा जवाब
इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय के पब्लिक ग्रीवांस विभाग की ओर से शिकायतकर्ता से संपर्क किए जाने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई को लेकर असंतोष जताया और मामले की पारदर्शी जांच की मांग दोहराई।
रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने मंदिर प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि स्वर्ण शिखर के जिन हिस्सों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। उन्होंने पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट या श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी की है, ताकि श्रद्धालुओं के बीच फैली आशंकाओं का समाधान हो सके।
अप्रैल में क्षतिग्रस्त हुआ था शिखर का एक हिस्सा
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, अप्रैल 2026 में मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य दिशा में स्थित शिखर का एक हिस्सा प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हुआ था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस नुकसान को ओलावृष्टि से भी जोड़ा गया है।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित तरीके से निकालकर मंदिर के लॉकर में रख दिया गया था। न्यास ने स्पष्ट किया है कि इस हिस्से के सुरक्षित रखे जाने को सोना गायब होने की घटना के रूप में पेश करना गलत है। प्रशासन ने मुख्य शिखर के पूरी तरह ढह जाने संबंधी दावों को भी खारिज किया है।
प्रशासन के इस स्पष्टीकरण के बाद मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक ओर शिकायतकर्ता ने स्वर्ण शिखर के कुछ हिस्सों को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर न्यास ने सोना सुरक्षित होने की बात कही है। ऐसे में वास्तविक स्थिति समझने के लिए संबंधित संरचना की तकनीकी जांच और उपलब्ध अभिलेखों का महत्व बढ़ जाता है।
शिखर के संरक्षण के लिए IIT मद्रास से तकनीकी सलाह
मंदिर न्यास ने शिखर के संरक्षण और मरम्मत के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के विशेषज्ञों की सहायता लेने की जानकारी दी है। प्रशासन के मुताबिक, मंदिर की धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता को ध्यान में रखते हुए मरम्मत का काम वैज्ञानिक और तकनीकी सलाह के आधार पर कराया जाएगा।
मीडिया में प्रकाशित न्यास के बयान के अनुसार, IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम ने जुलाई 2026 में प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर और लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले क्षरण का उल्लेख किया गया तथा संरक्षण कार्य से पहले आवश्यक तकनीकी परीक्षण और सूक्ष्म विश्लेषण की जरूरत बताई गई।
विशेषज्ञ टीम द्वारा नवंबर 2026 में मुख्य मंदिर परिसर का दोबारा निरीक्षण किए जाने का प्रस्ताव है। इस निरीक्षण और जरूरी परीक्षणों के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर शिखर की संरचनात्मक सुरक्षा, मरम्मत और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम तय किए जाएंगे।
सोने की चोरी की पुष्टि नहीं, जांच और पारदर्शिता पर नजर
फिलहाल मंदिर न्यास ने स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने के दावों को निराधार और भ्रामक बताया है। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता ने अपनी आशंकाओं के समाधान के लिए विस्तृत जांच और स्पष्ट जवाब की मांग की है। शिकायत दर्ज होने मात्र से चोरी की पुष्टि नहीं होती।
अब इस मामले में मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी, शिखर की तकनीकी जांच और शिकायत में उठाए गए सवालों पर होने वाली आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। काशी विश्वनाथ मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए मामले में तथ्यात्मक जानकारी सामने आना और श्रद्धालुओं की शंकाओं का समाधान होना जरूरी है।
नोट: इस खबर में सोना गायब होने से संबंधित बातें शिकायतकर्ता के आरोपों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। मंदिर न्यास ने इन आरोपों का खंडन किया है। चोरी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
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