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सिर्फ SC/ST होने से नहीं लगेगा एससी-एसटी एक्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

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जाति के कारण जानबूझकर अपमान और कानून की जरूरी शर्तें पूरी होना जरूरी, गाजियाबाद के जमीन विवाद मामले में आरोपी को राहत

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होने मात्र से एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लागू नहीं की जा सकतीं। एक्ट के तहत अपराध के लिए यह सामने आना जरूरी है कि आरोपी ने पीड़ित को उसकी जाति के कारण जानबूझकर अपमानित किया या ऐसा कृत्य किया, जो कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।

गाजियाबाद के जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को निरस्त कर दिया। हालांकि, मामले में लगाए गए अन्य आरोपों के संबंध में चल रही कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

केवल जाति का उल्लेख पर्याप्त नहीं

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान लागू करने के लिए केवल पीड़ित का एससी या एसटी समुदाय से होना पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष के आरोपों और उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कथित अपराध का संबंध पीड़ित की जाति से था। आरोपी की ओर से जाति के कारण जानबूझकर अपमान या ऐसा कोई कृत्य किया गया हो, जो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध बनता हो।

जमीन विवाद में हुई थी कार्रवाई

यह मामला गाजियाबाद में जमीन विवाद से जुड़ा था। आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की जा रही थी। आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

अन्य आरोपों पर कार्रवाई रहेगी जारी

हाईकोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त नहीं किया है। कोर्ट का आदेश एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही तक सीमित है। मामले में लगाए गए अन्य आरोपों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है हाईकोर्ट की यह टिप्पणी?

हाईकोर्ट की टिप्पणी उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें व्यक्तिगत, संपत्ति या जमीन विवाद के साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई जाती हैं। कोर्ट ने संकेत दिया है कि एक्ट की धाराएं लागू करने के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों का मौजूद होना जरूरी है। केवल शिकायतकर्ता के एससी या एसटी समुदाय से होने के आधार पर एक्ट की धाराएं स्वतः लागू नहीं हो जातीं।

कोर्ट की टिप्पणी का सार: एससी-एसटी एक्ट लागू करने के लिए केवल पीड़ित का SC/ST समुदाय से होना पर्याप्त नहीं है। कथित अपराध में जाति के कारण जानबूझकर अपमान या एक्ट में निर्धारित अन्य आवश्यक तत्वों का होना जरूरी है।

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