एसपी स्वर्ण प्रभात के दो साल: ड्रग्स तस्करी पर शिकंजा, 100 तस्करों को हुई सजा
18 वर्ष तक की कठोर सजा, 64 तस्करों को सात वर्ष या उससे अधिक का दंड; करीब 500 मामले अभी विचाराधीन
मोतिहारी: पूर्वी चंपारण में एसपी स्वर्ण प्रभात के पदस्थापन के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही पुलिस की ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का एक अहम आंकड़ा सामने आया है। जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में 100 तस्करों को न्यायालय से सजा दिलाई गई है। इनमें कई मामलों में कठोर सजा सुनाई गई है। अधिकतम सजा 18 वर्ष तक की हुई है।
पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सजा पाने वाले तस्करों में 64 को सात वर्ष या उससे अधिक की सजा मिली है। मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ लगातार चलाए गए अभियान और मामलों में प्रभावी पैरवी को इस उपलब्धि से जोड़कर देखा जा रहा है। उपलब्ध विवरण में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों में न्यायालय से सजा पाए 100 मामलों का उल्लेख है। 1
दूसरी ओर, जिले में ड्रग्स तस्करी से जुड़े करीब 500 तस्कर अभी अंडरट्रायल हैं। इन मामलों में न्यायालय में विचारण की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस का जोर नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों की गिरफ्तारी के साथ ही न्यायालय में मामलों की मजबूत पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने पर है।
युवाओं को तस्करी के जाल से दूर रहने की अपील
एसपी स्वर्ण प्रभात ने जिले के युवाओं से ड्रग्स तस्करी के जाल में नहीं फंसने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर अपराध है और इसमें कड़ी सजा के प्रावधान हैं। युवा किसी के बहकावे में आकर इस अवैध धंधे का हिस्सा न बनें। तस्करी से मिलने वाला पैसा थोड़े समय का लाभ दे सकता है, लेकिन इसका परिणाम जेल और कठोर सजा के रूप में सामने आ सकता है।
पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश है कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें न्यायालय से सजा दिलाने तक प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।

