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पिपरा थानाध्यक्ष निलंबित: FIR में देरी से वादी का क्लेम हुआ था रिजेक्ट

एसपी स्वर्ण प्रभात

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– पहाड़पुर थानाध्यक्ष रहते अंबेश कुमार ने बाइक चोरी की एफआईआर करने में की थी देरी, एसपी ने की सख्त कार्रवाई

पूर्वी चंपारण:

पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात ने पिपरा थानाध्यक्ष अंबेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पिछले साल पहाड़पुर थाने में उनके कार्यकाल के दौरान एक बाइक चोरी के मामले में FIR दर्ज करने में 7 दिन की देरी के कारण की गई। इस लापरवाही के चलते पीड़ित का इंश्योरेंस क्लेम कंपनी ने खारिज कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए SP ने स्वयं जांच की और दोषी पाए जाने पर यह कड़ा कदम उठाया।

मामले का पूरा घटनाक्रम

विगत वर्ष, जब अंबेश कुमार पहाड़पुर थाने के थानाध्यक्ष थे, एक बाइक चोरी की घटना सामने आई थी। पीड़ित ने तुरंत शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन FIR में 7 दिन की देरी हुई। इस विलंब के कारण इंश्योरेंस कंपनी ने पीड़ित के क्लेम को अस्वीकार कर दिया, जिससे उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। परेशान होकर पीड़ित ने डीजीपी (DGP) के जनता दरबार में अपनी गुहार लगाई। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की।जांच में पाया गया कि तत्कालीन एसएचओ अंबेश कुमार की लापरवाही के कारण यह घटना हुई। वर्तमान में पिपरा थाने में SHO के पद पर तैनात अंबेश को दोषी ठहराते हुए एसपी ने उन्हें निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।

एसपी का सख्त संदेश: जनता की सुनवाई प्राथमिकता

इस घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों (SHO), सर्किल इंस्पेक्टरों (CI) और SDPO को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य दिवस पर जन सुनवाई अनिवार्य रूप से की जाए। थानों और कार्यालयों में आने वाले आम लोगों को वापस नहीं लौटाया जाए। चाहे समस्या छोटी हो या बड़ी, सभी की शिकायतें सुनी जाएं और उनका समाधान करने का हरसंभव प्रयास किया जाए। एसपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा और उनकी समस्याओं का निराकरण है।

जनता में संतोष, पुलिस में हड़कंप:इधर एसपी स्वर्ण प्रभात की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से पीड़ित पक्ष और आम जनता में संतोष की भावना देखी जा रही है। वहीं, पुलिस महकमे में इसे लेकर हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल लापरवाह अधिकारियों के लिए सबक है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत करेगा।

आगे की कार्रवाई:निलंबन के साथ ही अंबेश कुमार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच के नतीजों के आधार पर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।यह घटना एक बार फिर पुलिस प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि जनता की छोटी-छोटी शिकायतों को नजरअंदाज करने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है। हालांकि एसपी की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि थानों में आम लोगों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

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