शनिवार, 7 नवंबर 2026 LIVE Daily Breakings — खबर सबसे पहले
ताजा और भरोसेमंद खबरें
ब्रेकिंग

मोतिहारी के सनराइज हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद हंगामा

मोतिहारी के सनराइज हॉस्पिटल में इलाज के दौरान प्रियांशु कुमार की मौत, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगा तोड़फोड़ की और NH 28 जाम किया। पुलिस जांच में जुटी।

3 मिनट पढ़ने का समय
शेयर करें
खबर व संपादन: धीरज श्रीवास्तव

मोतिहारी। शहर के सनराइज हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो जाने के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक की पहचान प्रियांशु कुमार (पिता – जयशंकर पटेल) के रूप में हुई है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने रुपए की मांग की थी। जब परिजन पैसे की व्यवस्था नहीं कर पाए तो जानबूझकर ऑक्सीजन सप्लाई काट दी गई, जिसके कारण प्रियांशु की मौत हो गई।गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की और बाहर निकलकर एनएच 28 को टायर जलाकर कुछ देर के लिए जाम कर दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद सड़क को खाली कराया।बताया जा रहा है कि हाल ही में रहमानिया मेडिकल सेंटर में भी एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने तोड़फोड़ की थी। लगातार इस तरह की घटनाओं से निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।—

परिजनों के आरोप और जांच का सवाल

मृतक प्रियांशु कुमार के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर पैसे की मांग करने और ऑक्सीजन सप्लाई काटने का आरोप लगाया है। ये परिजनों के आरोप हैं, जिनकी सच्चाई पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में ही तय होगी। इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है; पक्ष मिलने पर उसे भी शामिल किया जाएगा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

इलाज में लापरवाही के आरोप वाले मामलों में आम तौर पर पुलिस में लिखित शिकायत दी जाती है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साक्ष्य बनती है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 के जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य फैसले में कहा था कि डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के मामलों में आगे बढ़ने से पहले स्वतंत्र और सक्षम चिकित्सकीय राय ली जानी चाहिए। इसलिए ऐसे मामलों में अक्सर मेडिकल बोर्ड की राय मांगी जाती है। परिजन जिले के सिविल सर्जन कार्यालय में भी शिकायत दे सकते हैं।

अस्पताल में तोड़फोड़ पर बिहार में सख्त कानून

बिहार में चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा अधिनियम, 2011 लागू है। इस कानून के तहत किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल, नर्सिंग होम में तोड़फोड़ करना या डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसमें कारावास और जुर्माने के साथ नुकसान की भरपाई का भी प्रावधान है। साथ ही यही कानून अस्पतालों पर यह जिम्मेदारी डालता है कि मरीजों का इलाज तय मानकों के अनुसार और संवेदनशीलता से हो, और मरीज को रेफर करने का कारण उसकी पर्ची पर लिखकर बताया जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने पर भी अलग से कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पूर्वी चंपारण में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत के बाद हंगामे की एक अन्य घटना पढ़ें: चकिया के निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान मां-बच्चे की मौत। मोतिहारी की अन्य खबरों के लिए देखें: मोतिहारी।

About The Author

Share: WhatsApp Facebook X Telegram
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को IT नियम 2021 के नियम 18 के तहत जानकारी प्रदान की गई है | Information furnished to MIB under Rule 18, IT Rules 2021
📱

Daily Breakings App

खबरों से हमेशा जुड़े रहें

अब Daily Breakings की खबरें अपने मोबाइल पर और भी आसानी से पढ़ें।

⬇️ अभी App डाउनलोड करें

✓ आधिकारिक Daily Breakings App