आदेश जारी होने की तारीख: 16 अक्टूबर 2026 (जिला पदाधिकारी, शिवहर, ज्ञापांक 666/स्था.)
शिवहर: निगरानी की टीम के हाथों 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए पुरनहिया अंचल के राजस्व कर्मचारी रामकृत महतो को जिला प्रशासन ने सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शिवहर की जिला पदाधिकारी-सह-अनुशासनिक प्राधिकार प्रतिभा रानी ने 16 अक्टूबर 2026 को ज्ञापांक 666/स्था. से यह आदेश जारी किया। आदेश के साथ लगे सेवा विवरण के मुताबिक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की तिथि 30 नवंबर 2026 है, यानी बर्खास्तगी रिटायरमेंट से करीब 45 दिन पहले हुई है।
जनवरी में हुई गिरफ्तारी और उसके बाद के निलंबन की बात सामने आई थी, लेकिन लंबी विभागीय जांच के बाद आया यह बर्खास्तगी आदेश अब तक चर्चा में नहीं था। यह आदेश जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
सबसे बड़ी सजा: भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए भी अयोग्य
आदेश के अनुसार, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के प्रावधान (xi) के तहत “सरकारी सेवा से बर्खास्तगी” (Dismissal from Service) का दंड दिया गया है, जो सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए अयोग्यता भी होगी। आदेश में साफ लिखा है कि निलंबन अवधि में कर्मचारी को जीवन निर्वाह भत्ते के अलावा कुछ भी देय नहीं होगा। कार्यालय प्रधान को निर्देश दिया गया है कि इस दंड की प्रविष्टि कर्मचारी की सेवापुस्त में लाल स्याही से दर्ज की जाए।
कर्मचारी वेतन स्तर-8 (47,600 से 1,51,100 रुपये) में कार्यरत थे। आदेश की प्रति सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव, विशेष निगरानी इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और बिहार के सभी जिला पदाधिकारियों को भेजी गई है। पुरनहिया के अंचल अधिकारी को आदेश तामील कराकर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
दाखिल-खारिज के बदले मांगी थी रिश्वत
आदेश में दर्ज ब्योरे के मुताबिक, विशेष निगरानी इकाई (SVU), पटना के धावा दल ने 5 जनवरी 2026 को कर्मचारी को दाखिल-खारिज वाद संख्या 598/2025-26 के एवज में 10,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। इस पर विशेष निगरानी थाना कांड संख्या 01/2026, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा-7 में मामला दर्ज हुआ और उन्हें आदर्श केंद्रीय कारा, बेऊर (पटना) भेजा गया। जिला प्रशासन ने 8 जनवरी को आदेश ज्ञापांक 14 से गिरफ्तारी की तिथि से निलंबित कर दिया।
आदेश बताता है कि अंचल कार्यालय में 23 सितंबर 2025 को दायर सात दाखिल-खारिज वादों में से छह का निष्पादन 12 दिसंबर 2025 को हो गया था, लेकिन वाद संख्या 598 का प्रतिवेदन देर से 17 दिसंबर को दिया गया। इसके बाद 29 दिसंबर को आम सूचना निकाली गई और सुनवाई की तारीख 14 जनवरी 2026 तय थी। इसी बीच रिश्वत लेते गिरफ्तारी हुई।
जमानत पर छूटने के बाद 27 अप्रैल 2026 को उनका योगदान स्वीकार कर निलंबन से मुक्त किया गया, लेकिन उसी दिन आदेश ज्ञापांक 242 से उन्हें फिर निलंबित कर जिला राजस्व प्रशाखा, शिवहर में मुख्यालय तय कर दिया गया। 8 अप्रैल को ज्ञापांक 188 से विभागीय कार्यवाही शुरू हुई थी, जिसमें अपर समाहर्ता को संचालन पदाधिकारी और पुरनहिया के अंचल अधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी बनाया गया।
लापरवाही के भी कई आरोप, बचाव की दलील खारिज
आरोप पत्र में रिश्वत के अलावा कार्यालय से अनधिकृत अनुपस्थिति, बार-बार निर्देश के बावजूद काम में प्रगति नहीं होना, आधार सीडिंग के लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं करना और सरकारी योजनाओं के लिए भूमि चयन का प्रतिवेदन नहीं देने जैसे आरोप भी शामिल थे।
अपने बचाव में कर्मचारी ने करीब 40 साल की सेवा का हवाला दिया और दावा किया कि उनकी जेब में चुपके से पैसे रख दिए गए थे और काम पहले ही हो चुका था। अनुशासनिक प्राधिकार ने यह दलील नहीं मानी। आदेश में लिखा है कि “काम पहले हो चुका था, इसलिए रिश्वत की मांग का औचित्य नहीं था” वाली दलील अपने आप में निर्णायक नहीं है। आदेश के मुताबिक विभागीय कार्यवाही में “संदेह से परे सबूत” नहीं, बल्कि “संभावनाओं की प्रबलता” का सिद्धांत लागू होता है, और धावा दल की रिपोर्ट, बरामदगी व गवाहों के बयान से आरोप साबित होता है। प्रशासन ने इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसे कर्मी को सेवा में बनाए रखना जनहित के प्रतिकूल है।
पूरा आदेश यहां देखा जा सकता है: जिला पदाधिकारी, शिवहर का आदेश ज्ञापांक 666 (PDF)।
स्रोत: जिला प्रशासन शिवहर (स्थापना प्रशाखा) आधिकारिक आदेश

